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अमिताभ बच्चन ने ब्लॉग में लिखा, ‘अटकलें तो अटकलें ही हैं’

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Kohramlive : लंबे समय से अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की निजी जिंदगी में आई खटास को लेकर तरह-तरह की अफवाहें के बाद पहली बार महानायक अमिताभ बच्चन ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। अमिताभ बच्चन ने आज अपने ब्लॉग पर एक नोट साझा किया है। उन्होंने अपने हालिया ब्लॉग में कुछ ऐसा लिखा है, जो अब खबरों में छा गया है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमिताभ बच्चन ने ब्लॉग की शुरुआत कुछ इस तरह की है, ‘अलग दिखने और जीवन में इसकी उपस्थिति पर यकीन करने के लिए बहुत साहस, दृढ़ विश्वास और ईमानदारी की दरकार होती है। मैं अपने परिवार को लेकर बहुत कम ही बोलता हूं, क्योंकि वह मेरा अधिकार क्षेत्र है। मैं इसकी निजता को बनाये रखता हूं’।

‘अटकलें तो अटकलें ही हैं’

अमिताभ बच्चन ने आगे लिखा है, ‘अटकलें तो अटकलें ही हैं… वे बिना वेरिफिकेशन के वे असत्य अटकलें हैं…’। वेरिफिकेशन चाहने वाले अपने पेशे के लिए प्रमाण मांगते हैं। मैं तो उनकी पसंद के पेशे में होने की उनकी इच्छा को चुनौती नहीं दूंगा और मैं समाज की सेवा में उनकी कोशिशों की तारफी ही करूंगा। लेकिन असत्य.. या प्रश्न चिन्ह लगी कुछ चुनिंदा जानकारियां उनके लिए कानूनी सुरक्षा हो सकती हैं, जो सूचना देते हैं.. लेकिन संदिग्ध भरोसे का बीज भी इसी प्रतीक के साथ रोपा जाता है, जिसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है’।

प्रश्नवाचक चिन्ह वाले कंटेंट पर उठाए सवाल

अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में प्रश्न चिन्ह (?) का हवाला देते हुए लिखा है,  ‘प्रश्न चिन्ह के साथ आप जो चाहें लिखें, अभिव्यक्त करें… लेकिन जब आप उसके बाद प्रश्न चिह्न लगाते हैं, तो आप न केवल यह कह रहे होते हैं कि लिखा हुआ संदिग्ध हो सकता है… बल्कि आप गुप्त रूप से यह भी चाहते हैं कि पाठक उस पर विश्वास करे और उसे आगे बढ़ाये, जिससे वह फिर से मूल्यवान साबित हो जो आपने लिखा है’।

आपका काम खत्म हो गया?

आपका कंटेंट लिख जाता है। सिर्फ उस वक्त के लिए नहीं, बल्कि कई और पलों के लिए। पाठक जब उस पर प्रतिक्रिया देते हैं और फिर उस कंटेंट को विस्तार मिलता है। प्रतिक्रिया कैसी भी हो सकती है। नकारात्मक भी और भरोसे वाली भी। जो भी हो, लेखक को विश्वसनीयता प्रदान करनी चाहिए, यही लेखक का व्यवसाय है। दुनिया को झूठ या प्रश्ननाचक असत्य से भर दें और आपका काम खत्म हो गया? इस चीज ने किसी व्यक्ति या परिस्थिति को किस हद तक प्रभावित किया होगा, इसका ख्याल नहीं किया गया। अगर आपके पास कभी विवेक था तो इस तरह उसे दबा दिया गया????? इस पर मैंने प्रश्नवाचक चिन्ह लगा दिया….’।

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