Kohramlive : गुजरात की धरती पर जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बोले, तो शब्दों में न केवल सत्ता की गंभीरता थी, बल्कि एक साधक की सरलता भी झलक रही थी। उन्होंने बुधवार को अहमदाबाद में त्रिभुवन सहकारिता विश्वविद्यालय की नींव रखते हुए अपने रिटायरमेंट प्लान का ऐलान किया। उन्होंने कहा “मैं राजनीति से संन्यास के बाद वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती के अध्ययन में जीवन लगाऊंगा”। शाह ने कहा, “रासायनिक खाद से उपजा अन्न बीमारियां लाता है, जबकि प्राकृतिक खेती रोगों से मुक्ति और उपज में बढ़त देती है।” उन्होंने इसे वैज्ञानिक प्रयोग बताया और युवाओं से अपील की “धरती को उसकी प्रकृति लौटाओ, तुम्हें तुम्हारा स्वास्थ्य मिलेगा।”शाह ने त्रिभुवन सहकारिता विश्वविद्यालय का नाम अपने राजनीतिक मार्गदर्शक त्रिभुवन काका के नाम पर रखते हुये कहा, “चाहे कोई विरोध करे, यह विश्वविद्यालय काका के नाम का ही रहेगा।” उन्होंने जोड़ा, “गुजरात की महिलाएं आज भी उन्हें आशीर्वाद देती हैं।”
ऊंटनी के दूध से बदली तकदीर
एक महिला मिरल बेन रबारी ने जब बताया कि कैसे ऊंटनी का दूध बेचकर महिलाओं को आर्थिक ताकत मिली, शाह की आंखों में संतोष झलक उठा। यह सहकारिता नहीं, क्रांति है, उन्होंने कहा।












