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अमेरिका ने इस देश के राष्ट्रपति को बनाया बंधक, बस ड्राइवर से…

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Kohramlive : अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर शनिवार की सुबह जबरदस्त एयरस्ट्राइक कर दी। सोशल मीडिया पर सामने आये वीडियो में भीषण विस्फोट, धुयें के गुबार और आसमान में उठती आग की लपटें साफ दिखाई दीं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सनसनीखेज दावा किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिकी बलों ने पकड़ लिया है। दोनों को देश से बाहर भेज दिया गया है। हालांकि उन्हें कहां रखा गया है, यह अब भी रहस्य बना हुआ है। अब अमेरिका ने दावा किया है कि नशीली दवाओं के ठिकानों पर दर्जनों हमले किये गये। डेल्टा फोर्स ने मादुरो को पकड़ने के लिये सीधा ऑपरेशन चलाया ट्रंप प्रशासन मादुरो को राष्ट्रपति नहीं, “नार्को-क्रिमिनल” मानता है। मादुरो और उनकी पत्नी हिरासत में हैं।

अमेरिका के इस कदम से दुनियाभर में चिंता और बेचैनी फैल गई है। निकोलस मादुरो कभी काराकास की सड़कों पर बस चलाते थे। यहीं से उनकी जिंदगी ने राजनीति की पटरी पकड़ी। बस ड्राइवरों की यूनियन के नेता बने, आंदोलनों में कूदे और वामपंथी नेता के तौर पर पहचान बनाई। राजनीति में एंट्री के वक्त बड़े नेता उनकी बस ड्राइवर पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाते थे, लेकिन मादुरो ने इसे ही अपनी ताकत बना लिया, “मैं आम आदमी हूं” की छवि गढ़ी। 1992 में जब ह्यूगो शावेज की तख्तापलट की कोशिश नाकाम हुई और वे जेल पहुंचे, तो मादुरो ने सड़क से संसद तक आंदोलन खड़ा कर दिया। शावेज की रिहाई के बाद मादुरो उनके सबसे भरोसेमंद साथी बने। दोनों ने मिलकर फिफ्थ रिपब्लिक मूवमेंट खड़ा किया और फिर सत्ता की नींव रखी।

राष्ट्रपति बनते ही अमेरिका से टकराव

सितंबर 2013 में मादुरो राष्ट्रपति बने और तभी से अमेरिका उनकी आंखों का कांटा बन गया। अमेरिकी राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया गया, बिजली ग्रिड फेल करने का आरोप लगा। 2014 के छात्र आंदोलनों में विदेशी साजिश का दावा किया गया। कई विदेशी मीडिया चैनलों पर पाबंदी लगा दी गई। 2015 में अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई में आर्थिक प्रतिबंधों की झड़ी लगा दी। साल 2018 में मादुरो की चुनावी जीत को अमेरिका ने धोखाधड़ी बताया। सैन्य परेड के दौरान ड्रोन अटैक हुये, मादुरो बाल-बाल बचे। तख्तापलट की चर्चायें तेज हुईं। साल 2019 अमेरिकी समर्थित हुआन गाइदो ने खुद को राष्ट्रपति घोषित किया। ट्रंप प्रशासन ने गाइदो को मान्यता दी। मादुरो ने अमेरिकी राजनयिकों को 24 घंटे में देश छोड़ने को कहा। साल 2020 में दो अमेरिकी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई। उनपर तख्तापलट की साजिश का आरोप लगा। 20 साल की सजा हुई। ट्रंप के जाने के बाद भी प्रतिबंध बने रहे, हालांकि 2023 में चुनावी सुधारों के वादे पर कुछ ढील दी गई। जनवरी 2025 में सत्ता में लौटते ही ट्रंप ने मादुरो पर ड्रग तस्करी, नार्को-आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क चलाने जैसे गंभीर आरोप लगाये। इसके बाद वेनेजुएला की नावों पर हमले किये गये, इसमें 100 से ज्यादा मौतें हुई। CIA को खुली छूट दी गई। युद्धपोत और हजारों सैनिक तैनात कर दिये गये। तेल टैंकरों की घेराबंदी कर वेनेजुएला की कमर तोड़ने की रणनीति अपनाई गई।

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