Ranchi : मां दुर्गा के दरबार में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़, सड़कों पर भक्तों का सैलाब और पंडालों में उमंग का माहौल। दुर्गा पूजा के इस उत्सवी रंग में सुरक्षा का मजबूत पहरा लगाने के लिये झारखंड पुलिस अब स्मार्ट तकनीक का सहारा लेने की तैयारी में है। इस बार निगरानी सिर्फ CCTV कैमरों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से भीड़ का आकलन करने, संदिग्धों की पहचान के संकेत जुटाने और बिछड़े बच्चों को खोजने की कोशिश की जायेगी। राजधानी रांची समेत धनबाद और जमशेदपुर जैसे शहरों में इस तकनीक के इस्तेमाल को लेकर तैयारी की जानकारी सामने आई है। हालांकि, कितने स्थानों पर AI आधारित निगरानी होगी और किन जिलों में इसकी सुविधा उपलब्ध रहेगी, इस पर अभी पूरी तस्वीर साफ नहीं है।
भीड़ बढ़ते ही पुलिस को मिलेगा अलर्ट, मौके पर होगी कार्रवाई
दुर्गा पूजा के दौरान बड़े पंडालों, प्रमुख सड़कों और चौक-चौराहों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। कभी-कभी अचानक बढ़ती भीड़ से रास्ते जाम हो जाते हैं और लोगों की आवाजाही मुश्किल हो जाती है। ऐसे में समय पर स्थिति का अंदाजा लगाना पुलिस के लिये बड़ी चुनौती होता है। AI आधारित तकनीक इस चुनौती को कम करने में मदद कर सकती है। कैमरों और संबंधित सिस्टम से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर भीड़ वाले इलाकों का अनुमान लगाया जा सकेगा। इससे पुलिस को यह तय करने में मदद मिल सकती है कि कहां अतिरिक्त जवान तैनात करने हैं, किस रास्ते पर यातायात नियंत्रित करना है और किस स्थान पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। सुरक्षा व्यवस्था में AI के इस्तेमाल का एक महत्वपूर्ण पहलू फेस रिकग्निशन यानी चेहरा पहचानने वाली तकनीक है। यदि किसी स्थान पर यह सुविधा उपलब्ध है और पुलिस रिकॉर्ड से उसका तकनीकी समन्वय किया गया है, तो कैमरे में कैद चेहरे का उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान किया जा सकता है। इससे किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान के संकेत मिल सकते हैं और पुलिस को आगे की जांच में मदद मिल सकती है। हालांकि, तकनीक से मिलने वाले संकेत को अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। किसी व्यक्ति के बारे में कार्रवाई करने से पहले पुलिस को अन्य तथ्यों के आधार पर भी पुष्टि करनी होगी।
भीड़ में बिछड़ गया बच्चा, तो AI बनेगा मददगार
दुर्गा पूजा के मेले और पंडालों में बच्चों का परिवार से बिछड़ जाना बेहद परेशान करने वाला पल होता है। माता-पिता की नजरें हर चेहरे में अपने बच्चे को तलाशती हैं, जबकि बच्चा भीड़ में घबराकर अपनों को खोजता रहता है। ऐसी स्थिति में AI आधारित तकनीक मददगार हो सकती है। यदि बच्चे की तस्वीर उपलब्ध हो, संबंधित कैमरों में जरूरी सुविधा हो और निगरानी सिस्टम आपस में समन्वित हों, तो फुटेज में उससे मिलते-जुलते चेहरे की तलाश की जा सकती है। इससे बच्चे को खोजने की प्रक्रिया तेज करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, यह सुविधा हर कैमरे या हर स्थान पर उपलब्ध हो, इसकी गारंटी नहीं है। IG अभियान नरेंद्र सिंह ने मीडिया को बताया कि दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान उपलब्ध AI सॉफ्टवेयर तथा टैबलेट आधारित तकनीक का इस्तेमाल करने के लिये पुलिस अधिकारियों से अनुरोध किया गया है। उन्होंने कंट्रोल रूम का बेहतर उपयोग करने पर भी जोर दिया है। इस तैयारी का उद्देश्य भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। तकनीक के जरिये मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक पुलिस बल की तैनाती और संवेदनशील स्थानों की निगरानी के लिये किया जा सकता है। झारखंड में AI आधारित निगरानी का अनुभव बिल्कुल नया नहीं है। IG अभियान नरेंद्र सिंह ने बताया कि देवघर में श्रावणी मेले के दौरान AI आधारित कंट्रोल रूम का इस्तेमाल किया गया था। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था से भीड़ का अनुमान लगाने, संदिग्ध अपराधियों की पहचान के संकेत हासिल करने और लापता बच्चों को खोजने में सहायता मिली थी। श्रावणी मेले के अनुभव के आधार पर दुर्गा पूजा के दौरान भी ऐसी तकनीक का उपयोग सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मददगार हो सकता है।





