इस रोज से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात लगभग 9 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और 11 अक्टूबर की रात 9 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्टूबर, रविवार माना गया है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक, देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना का विशेष महत्व होता है। इसे पूजा की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6.19 बजे से 10.12 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक है। कलश स्थापना के समय स्वच्छता और विधि-विधान का ध्यान रखें। स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करना भी उचित रहेगा।
नौ दिनों में किस दिन होगी किस माता की पूजा?
नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूप की आराधना की जाती है। यहां देखें नौ दिनों का पूरा कैलेंडर।
11 अक्टूबर, रविवार: मां शैलपुत्री की पूजा और घट स्थापना
12 अक्टूबर, सोमवार: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
13 अक्टूबर, मंगलवार: मां चंद्रघंटा की पूजा
14 अक्टूबर, बुधवार: मां कूष्मांडा की पूजा
15 अक्टूबर, गुरुवार: मां स्कंदमाता की पूजा
16 अक्टूबर, शुक्रवार: मां कात्यायनी की पूजा
17 अक्टूबर, शनिवार: मां कालरात्रि की पूजा
18 अक्टूबर, रविवार: महाष्टमी की पूजा
19 अक्टूबर, सोमवार: महानवमी और मां सिद्धिदात्री की पूजा
तिथियों और पूजा के स्थानीय विधान में अंतर संभव है, इसलिये अष्टमी और नवमी के अनुष्ठानों के लिये अपने क्षेत्र के पंचांग से पुष्टि कर लें।
पहले दिन ऐसे करें मां दुर्गा की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले गणेश जी का स्मरण कर पूजा का संकल्प लें। फिर विधि के अनुसार कलश स्थापना करें और पात्र में मिट्टी भरकर जौ बोयें। मां शैलपुत्री को फूल, अक्षत, धूप, दीप और फल-मिठाई अर्पित करें। इसके बाद दुर्गा सप्तशती या देवी के मंत्रों का पाठ करें और आरती के साथ पूजा संपन्न करें। व्रत रखने वाले भक्त अपनी सेहत और सामर्थ्य के अनुसार उपवास करें। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, स्वच्छता और मन की एकाग्रता मानी जाती है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन हस्त नक्षत्र और शुक्ल योग का संयोग बताया जा रहा है। इसके साथ गजकेसरी योग का भी उल्लेख किया गया है। नवरात्रि के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग बनने की संभावना भी जताई गई है। धार्मिक मान्यताओं में इन योगों को पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। हालांकि, योगों की सही तिथियों और समय की पुष्टि पंचांग से करना जरूरी है।
Disclaimer : यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय गणनाओं और उपलब्ध पंचांग संबंधी विवरणों पर आधारित है। पूजा के मुहूर्त, तिथियों और शुभ योगों की स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।





