Kohramlive : 37 साल पहले भी अहमदाबाद दहला था। वो हादसा, जो दिलों में फिर से जिंदा हो गया। 19 अक्टूबर 1988, सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर एयरपोर्ट से महज 3 किलोमीटर दूर, इंडियन एयरलाइंस का विमान चिलोदा-कोतरपुर के पास बिजली के ट्रांसमिशन टावर से टकराया और 133 जिंदगियां राख हो गई थी और अहमदाबाद का आसमान उस दिन ख़ामोश हो गया। 37 साल बाद फिर वहीं चीख “Mayday… Mayday…”इसी शहर में एक और फ्लाइट ने उड़ान भरी थी लंदन की ओर, लेकिन टेकऑफ के ठीक 5 मिनट बाद बोइंग 787-8 का संतुलन बिगड़ा, और भयानक हादसा हो गया। राहत-बचाव जारी है, पर आसमान एक बार फिर रो पड़ा।
1938 में
1938 में पहला विमान हादसा हुआ। यह हादसा MP के दतिया में हुआ था। इसमें 7 मौतें हुई थी। वियतनाम से पेरिस जा रहे विमान में आग लगी और मध्यप्रदेश के आकाश में धुआं बन गया सपना।
1943 में
1943 में टाटा नेशनल एयरलाइंस महाराष्ट्र के लोनावला में पहाड़ियों से टकराकर हादसे का शिकार बनी। इसमें 6 लोगों की जान चली गई। यह इतिहास की पहली निजी एयरलाइंस हादसे था।
1962 में
1962 में महाराष्ट्र के जुन्नार में एलिटालिया 771 हादसे का शिकार हो गया। इसमें 94 मौतें हुई। इटली से आ रही फ्लाइट दिशाहीन होकर महाराष्ट्र की एक पहाड़ी से टकरा गई।
1972 में
1972 में हरियाणा के पालम में जापान एयरलाइंस 471 हादसे का शिकार हुआ। इसमें 85 मौतें हुई। 82 मुसाफिर और 3 जमीनी नागरिक, सब कुछ खत्म। कारण बना रहस्य।
1976 में
1976 में फ्लाइट 171 मुंबई में विमान हादसे में 95 मौतें हो गई। इंजन में खराबी और फिर कॉकपिट में आग, कोई न बचा।
1978 में
1978 में बोइंग 747 विमान अरब सागर जा गिरा, जिसमें 213 जान चली गई। एक यंत्र की गड़बड़ी के चलते यह हादसा हुआ था।
1990 में
1990 में बंगलूरू एयरबस हादसा में 92 मौतें, 54 घायल हो गये। गोल्फ कोर्स बना कब्रिस्तान। पायलट की छोटी सी गलती, इतनी बड़ी तबाही।
1993 में
1993 में औरंगाबाद में विमान और ट्रक की टक्कर में 55 मौतें हो गई। रनवे पर लॉरी से टकरा गया प्लेन। इंसानी चूक की कीमत जिंदगी से चुकाई गई।
1996 में
1996 में भारत का सबसे भीषण विमान हादसा हुआ। इसमें 349 मौतें हुई। यह हादसा चरखी दादरी में हुआ था। हवा में दो विमान आमने-सामने टकरा गई थी। दो मुल्क,और तीन सौ से ज्यादा लाशें बिछ गई।
2000 में
2000 में लैंडिंग के समय अनियंत्रित विमान पटना एयर क्रैश हो गया, इसमें 60 मरे।
2010 में
2010 में मंगलुरू एयर क्रैश में 158 मौतें हुई। टेबलटॉप रनवे, भारी बारिश और एक गलती के चलते पूरा विमान दो टुकड़ों में बंट गया।
2020 में
2020 में कोझिकोड एक्सप्रेस हादसे में 21 मौतें, 110 घायल हुये। कोरोनाकाल में घर लौटते प्रवासियों की आखिरी यात्रा, बारिश और रनवे की सीमाएं मौत बन गईं। हर विमान हादसे में कोई मां का बेटा था, कोई बेटी का बाप, कोई दुल्हन का दूल्हा और कोई सिर्फ एक मुसाफिर जो लौटना चाहता था। पर लौट सका।





