Palamu : झारखंड के झीलों में इन दिनों परदेस से आई परिंदों की चहचहाहट रच रहा है। गढ़वा, पलामू और लातेहार की झीलें और नदियां मानो किसी खूबसूरत कविता में बदल गई हैं। साइबेरिया, रूस, यूरोप और तिब्बत से आये सैकड़ों प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर की थकान भरी उड़ान के बाद यहां कुछ सुकून के पल तलाशते नजर आ रहे हैं। सर्दियों की दस्तक के साथ ही यह इलाका प्रवासी पक्षियों का अस्थायी बसेरा बन जाता है। कमलदह झील, सोन नदी, कोयल नदी और अनराज–मलय डैम के किनारे सुबह की धूप में पंख फैलाये ये पक्षी शाम ढलते ही पानी पर उतरते हैं और पूरा इलाका प्रकृति की जीवंत तस्वीर बन जाता है। वन विभाग के मुताबिक इस क्षेत्र में अब तक 180 से अधिक प्रजातियों के पक्षी दर्ज किये गये हैं। इनमें गैडवाल, स्लिंग डक, नॉर्दर्न पिनटेल, कॉमन टील, यूरेशियन गौरैया, किंगफिशर, बैर-हेडेड गूज (चकवा–चकई) खासकर कमलदह झील का ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व इसे पक्षियों के लिये सबसे पसंदीदा ठिकाना बनाता है। यह नजारा जितना मनमोहक है, उतनी ही चिंता की लकीर भी खींचता है। पिछले एक दशक में प्रवासी पक्षियों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। अवैध शिकार, मानवीय दखल और पर्यावरणीय असंतुलन
इन परिंदों के लिये सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुये वन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है, झीलों और नदियों पर निगरानी शुरू की है। नियमित पक्षी गणना अभियान चलाया जा रहा है।

















