Kohramlive : गुजरात के वडनगर के छोटे-से मोध-घांची परिवार का लड़का अब पूरे देश की राजनीति का ध्रुव बन चुका है। कभी चुनौतीपूर्ण दौर में घिरा, कभी आलोचना की आंधी में तैरता, नरेंद्र मोदी ने हर बार नये तरीके से जनता के विश्वास और देश की राजनीति की परिभाषा बदल दी। 75 साल की उम्र में, उनका सफर यह संदेश देता है, संघर्ष और दूरदर्शिता से राजनीति को जनता की सेवा का सबसे शक्तिशाली माध्यम बनाया जा सकता है। आज यानी 17 सितंबर मोदी 75 साल के हो गये। मोदी केवल उम्र के लिहाज से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक अनुभव और दूरदर्शिता के लिहाज से भी एक नया मुकाम हासिल कर चुके हैं।
नेहरू को पीछे छोड़ने की राह पर
मोदी लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बने रहने वाले नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ने की राह पर हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और हिंदुत्व विचारधारा को नई दिशा दी, जिससे पार्टी ने बड़े पैमाने पर जनता का विश्वास हासिल किया। युवाओं, छोटे शहरों और मिडिल क्लास के लिये राजनीति को एक सुलभ मंच बनाया। पुराने कुलीन वर्गों की बजाय व्यवहारिक मेहनत और जनता की जुबान को प्राथमिकता दी। PM मोदी ने पार्टी को बनिया-ब्राह्मण की पार्टी होने की छवि से बाहर निकाला। कई ओबीसी नेताओं को बड़े पद दिये। दलित और आदिवासी नेताओं को राष्ट्रपति पद पर भेजकर समाज के विभिन्न वर्गों को सशक्त किया। जाति जनगणना के फैसले के साथ विपक्ष के प्रयासों को नाकाम किया। मोदी की सरकार ने गुजरे 11 साल में कई बड़े बदलाव किये, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया। यूसीसी और वन नेशन वन इलेक्शन की दिशा में कदम बढ़ाया। बीजेपी के लिये शहरी-ग्रामीण, जाति और धर्म आधारित विभाजन से परे जनता का भरोसा हासिल किया।
मोदी का राजनीतिक सफर
2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने। 2002 के गुजरात दंगों ने एक समय उनके करियर को प्रभावित किया। विकास पुरुष के रूप में नई पहचान बनाई, टाटा नैनो को गुजरात में लाया। वाइब्रेंट गुजरात समिट को निवेश का प्लेटफॉर्म बनाया। 2014 में बीजेपी ने स्वतंत्र बहुमत के साथ केंद्र में सत्ता हासिल की।












