Chauparan : चौपारण के एडुकेयर क्लासेस बसरिया के इंटरमीडिएट छात्रों का जोश आज आसमान छू रहा था। उम्मीदों से भरी आंखें, मुस्कुराते चेहरे और ज्ञान की प्यास और फिर शुरू हुई एक एक दिवसीय शैक्षणिक यात्रा, जो किताबों के पन्नों से निकलकर सीधे जीवन के असल पन्नों पर उतरती चली गई। यात्रा का पहला पड़ाव रांची का मशहूर हुंडरू जलप्रपात था। फुहारों की ठंडी बौछारें, गर्जन करती जलधारा और उसके बीच खड़े छात्र मानो प्रकृति ने खुद अपने हाथों से उन्हें भूगोल पढ़ा दिया हो। छात्रों ने जलप्रपात की संरचना, उत्पत्ति और पर्यावरणीय तंत्र को नजदीक से समझा, शिक्षकों ने बताया कि कैसे जलधारा समय के साथ चट्टानों को तराशती है, प्रकृति की विराटता देखकर कई छात्रों की आंखें आश्चर्य से चमक उठीं। इसके बाद काफिला पतरातू घाटी पहुंचा। लहराती पहाड़ियां, बादलों के झुरमुट और हवा में घुली नई-नई खुशबू। छात्रों ने यहां सीखा घाटी के भू-आकृतिक स्वरूप की वैज्ञानिक व्याख्या, पतरातू डैम की उपयोगिता और जल-संसाधन प्रबंधन, प्रकृति संरक्षण में जलाशयों की अहम भूमिका, पतरातू की हरियाली ने हर छात्र के मन में जैसे ताजगी का फव्वारा भर दिया।
प्राकृतिक सौंदर्य और संस्कृति का संगम
यात्रा आगे बढ़ी और पहुंची हजारीबाग के उद्यान, प्राकृतिक पार्क और स्थानीय ऐतिहासिक स्थलों के बीच छात्रों ने खोजा, वन्य जीव-जंतुओं की विविधता, क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, प्राकृतिक संसाधनों का महत्व। शिक्षकों ने पूरे भ्रमण के दौरान भूगोल, इतिहास और पर्यावरण के गहरे पहलुओं पर रोशनी डाली। छात्रों ने कहा कि “किताब में पढ़ा था, पर आज आंखों से देखकर समझ आया।” एडुकेयर क्लासेस के डायरेक्टर चन्दन राणा ने बताया कि ऐसे भ्रमण छात्रों की समझ, अनुभव और दृष्टिकोण को नई दिशा देते हैं। आगे भी ऐसे कार्यक्रम जारी रहेंगे। यात्रा सुरक्षित, शांतिपूर्ण और अविस्मरणीय रही। विद्यार्थियों और शिक्षकों की तस्वीरों में कैद मुस्कानें इस बात की गवाह हैं कि यह दिन
जीवन भर साथ रहने वाली सीख थी।




