Hazaribagh : कहते हैं, बेटी घर की रौनक होती है। उसकी हंसी से आंगन खिलता है और उसकी विदाई पर आंखें नम होती हैं। मगर हजारीबाग के चौपारण में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जहां बेटी की विदाई नहीं हुई, बल्कि उसके जिंदा रहते ही उसका पिंडदान कर दिया गया। कसूर बस इतना कि 18 साल की युवती ने अपनी जिंदगी का साथी अपनी पसंद से चुन लिया। यह घटना चौपारण के पांडेयबारा गांव की है। यहां एक परिवार ने अपनी बेटी के प्रेम विवाह को स्वीकार करने के बजाय उससे सारे रिश्ते खत्म करने का फैसला कर लिया। पिता, भाई और चाचा श्मशान घाट पहुंचे। वहां बेटी की तस्वीर रखी गई, मुंडन कराया गया और हिंदू रीति-रिवाज से श्राद्धकर्म और पिंडदान किया गया। मानो बेटी जिंदा नहीं… उनके लिये मर चुकी हो।
एक महीने पहले घर से निकली थी बेटी
बताया गया कि खेमन प्रसाद की 18 साल की बेटी करीब एक महीने पहले अचानक घर से चली गई थी। बाद में परिवार को पता चला कि वह नरैना गांव के पवन साव के साथ गई है।परिजनों ने चौपारण थाना में आवेदन देकर बेटी की बरामदगी की गुहार लगाई। पुलिस ने तलाश शुरू की और करीब एक महीने बाद युवती और युवक को आंध्र प्रदेश से बरामद कर चौपारण लेकर आई। इसके बाद परिवार ने बेटी को समझाने की काफी कोशिश की। घर लौटने और अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा गया। मगर युवती अपने फैसले पर अडिग रही। वह अपने प्रेमी के साथ जिंदगी बिताना चाहती थी।
बेटी ने नहीं बदला फैसला तो परिवार ने बदल दिया रिश्ता
परिवार की तमाम कोशिशें जब नाकाम रहीं तो उन्होंने बेटी से संबंध खत्म करने का निर्णय लिया। बीते गुरुवार को पिता, भाई और चाचा श्मशान घाट पहुंचे। वहां बेटी की तस्वीर रखी गई। मुंडन कराया गया और पिंडदान की रस्म पूरी की गई। यह केवल एक धार्मिक रस्म नहीं थी। इसके जरिये परिवार ने समाज के सामने संदेश दिया कि अब वह बेटी को अपने लिये मृत मान चुका है। उधर, युवती अपने ससुराल में रह रही है।







