- क्रेडिट लिंकेज कार्यक्रम से सफलता के नए सोपानों पर सतत आगे बढ़ने का सिलसिला जारी
कोहराम लाइव डेस्क : महिलाएं योग्य और कुशल होंगी, तो समाज और राज्य मजबूत होंगे। आज के समय में बेशक झारखंड की ग्रामीण महिलाएं खेती, पशुपालन एवं कारोबार में भी हाथ आजमाते हुए सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। ग्रामीण विकास विभाग के तहत झारखंड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी ऐसी महिलाओं को हर संभव सहायता कर रही है। सरकार के आर्थिक मदद का ही परिणाम है कि आज झारखंड की महिलाएं सशक्तीकरण की नई मिसाल गढ़ रही हैं। हर वह काम जो पुरुष कर रहे हैं, उन्हें महिलाएं भी बखूबी अंजाम दे रही हैं।
सखी मंडलों की प्रभावी भूमिका
महिलाओं को सखी मंडल से जोड़कर सशक्त आजीविका उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। महिलाओं के सशक्तीकरण में सबसे अधिक सहायक क्रेडिट लिंकेज बन रहा है। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत राज्य में अब तक 2.54 लाख सखी मंडल के गठन के माध्यम से लगभग 32 लाख परिवारों को सखी मंडल से जोड़ा गया। करीब एक लाख सखी मंडलों को 387 करोड़ की राशि ग्रामीण आजीविका मिशन के क्रेडिट लिंकेज के जरिये बैंकों से उपलब्ध कराया गया है।

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क्रेडिट लिंकेज ने सपने को किया साकार
सुदूर गांव की रहने वाली एक साधारण महिला के लिए खुद की दुकान का संचालन किसी सपने से कम नहीं था, लेकिन देवंती देवी ने सखी मंडल से जुड़कर इस सपने को पूरा किया। आज अच्छी आमदनी कर रही हैं। गिरिडीह जिले की पोरदाग गांव की रहने वाली 42 वर्षीया देवंती ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह दो दुकानों का मालकिन होंगी। एनका मानना है कि क्रेडिट लिंकेज ने उनके सपने को साकार किया।
अन्य दीदियों के साथ बैठकर मिला हौसला
सखी मंडल में पुस्तक संचालिका का कार्य करते हुए एवं अन्य दीदियों के साथ बैठकर देवंती को हौसला एवं जीवन में कुछ कर गुजरने का जज्बा मिला। देवंती ने सखी मंडल से जुड़कर कई महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू कर अच्छी आमदनी करते देखा था। देवंती बताती हैं कि दूसरों को सफल उद्यमी बनते देख मैने भी हिम्मत जुटाई।

50 हजार का लोन लेकर शुरू किया होटल
तीन साल पहले अपने सखी मंडल को मिलने वाले क्रेडिट लिंकेज से 50,000 का लोन लेकर चाय-नाश्ते का होटल देवंती ने शुरू किया। चह कहती है कि इससे मेरी रोजाना की 500 से 1000 की आमदनी हो जाती है। देवंती यहीं नहीं रुकीं अपनी सफलता से उत्साहित होकर एक साल के बाद सखी मंडल के लोन को चुका कर फिर से एक राशन दुकान की शुरुआत की। इस राशन दुकान के चलाने में उनके बेटे भी उनकी मदद करते हैं। इस तरह सरकार द्वारा मिल रहे आर्थिक सहयोग से ग्रामीण महिलाओं को आजीविका का आधार और खुद को साबित करने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
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