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​SDO बने शिक्षक, बच्चों से बोले, विज्ञान डर नहीं, तर्क का नाम है…

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Garhwa(Nityanand Dubey) : सुबह की धूप हल्की थी, बच्चों के चेहरे पर उत्सुकता की चमक। टंडवा के पीएम श्री सेंट्रल स्कूल के छात्रों को आज अंदाजा नहीं था कि उनकी कक्षा में कोई “अतिथि शिक्षक” आने वाले हैं और वह भी कोई और नहीं, बल्कि गढ़वा के सदर SDO संजय कुमार। विद्यालय पहुंचते ही SDO ने बच्चों से हंसी-मजाक में बात की, पढ़ाई के बारे में पूछा और सहज भाव से कहा, “बताओ, किस विषय में सबसे ज्यादा परेशानी होती है?” कक्षा दसवीं के कुछ बच्चों ने झिझकते हुये कहा, “सर, फिजिक्स और केमिस्ट्री।” फिर शुरू हुआ वह नजारा जो शायद बच्चे जीवनभर न भूलें। SDO ने झट से शिक्षक की भूमिका संभाली। ब्लैकबोर्ड के सामने खड़े होकर बोले, “विज्ञान को याद मत करो, उसे समझो। सवाल मत रटिये, उनके पीछे के तर्क को पकड़िये।” उन्होंने विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव को इतने सरल और रोचक ढंग से समझाया कि बच्चे ताली बजाने लगे। बोर्ड पर चाक से बनती रेखायें, करंट के तीर और चुंबक की वक्र रेखाएं, सब बच्चों की आंखों में चमक बनकर उतर गईं।

केमिस्ट्री में गंध से नहीं, तर्क से पहचान

फिर बारी आई हाइड्रोकार्बन के IUPAC नामकरण की। SDO ने कहा, “रसायनशास्त्र डर का नहीं, नियमों का खेल है।”
उन्होंने आसान तरकीबों से नामकरण के तरीके सिखाये, बच्चे मुस्कुराते हुये बोले, “अब तो केमिस्ट्री भी आसान लग रही है, सर!” कक्षा खत्म हुई तो खूब तालियां बजी। बच्चे उन्हें घेरकर सवाल पूछते रहे, शिक्षक मुस्कुरा रहे थे। विद्यालय के शिक्षकों ने भी कहा, “ऐसे अधिकारी अगर कभी-कभी शिक्षक बन जायें, तो शिक्षा में नई ऊर्जा आ जायेगी।”

जीवन का सबक भी दिया

विदाई के वक्त SDO ने बच्चों से कहा कि “अच्छे अंक पाना जरूरी है, लेकिन अच्छा इंसान बनना उससे कहीं बड़ा लक्ष्य है। उन्होंने मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी को जीवन का सबसे बड़ा विज्ञान बताया।

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