Dumka : बचपन की दोस्ती, बारिश की छुट्टी और प्रकृति की गोद में कुछ पल सुकून के यही सोचकर रूपांकर दत्ता अपने तीन दोस्तों के साथ बीरभूम से झारखंड के घाघर वाटरफॉल तक आया था। लेकिन किसे खबर थी कि ये सफर उसकी जिंदगी की आखिरी मंज़िल बन जायेगा। 22 साल का रूपांकर नलहटी थाना क्षेत्र के चतरा गांव का रहने वाला था। 2 बाइक पर सवार होकर चार दोस्त रूपांकर, योगेश, साहिल और सरफराज वॉटरफॉल घूमने आये थे। सभी दोस्त पानी में छलांग लगा रहे थे, मस्ती अपने चरम पर थी तभी अचानक रूपांकर गहरे पानी में चला गया। साथियों ने बचाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन क़ुदरत का फैसला कुछ और था। पास में धान की रोपाई कर रहे ग्रामीण दौड़े, करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद जब रूपांकर का शव निकला, तब तक देर हो चुकी थी। गोपीकांदर थानेदार सुमित कुमार भगत ने बताया कि युवक शादीशुदा था और अपने माता-पिता का इकलौता सहारा भी।
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