Delhi : भारत इस साल अपना 77वां गणतंत्र दिवस नई सोच और नये संदेश के साथ मनाने जा रहा है। 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर होने वाली शानदार परेड में इस बार देश की असली ताकत आम नागरिक खुद मुख्य अतिथि की तरह मौजूद होंगे। करीब 10 हजार विशेष अतिथि, जिन्होंने अपने असाधारण कार्यों से भारत को नई दिशा दी है, इस ऐतिहासिक परेड के साक्षी बनेंगे। सरकार की यह पहल समावेशी भारत की मजबूत तस्वीर पेश करती है। अतिथियों की सूची मेहनतकश भारत की जीवंत झलक है। इसमें इनोवेटर्स और स्टार्टअप उद्यमी, रिसर्चर और वैज्ञानिक सोच वाले युवा, स्वयं सहायता समूहों की महिलायें, पीएम मुद्रा योजना से सफल व्यवसाय खड़ा करने वाली महिलायें, रेहड़ी-पटरी विक्रेता और कलाकार, खेतों में पसीना बहाने वाले किसान, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र के कर्मयोगीशामिल हैं। इस बार की परेड में पैरा एथलेटिक्स चैंपियन, प्राकृतिक खेती करने वाले किसान और गगनयान-चंद्रयान मिशन से जुड़े इसरो के वैज्ञानिक भी मौजूद रहेंगे। 1950 में संविधान लागू होने के साथ भारत गणराज्य बना था। आज, 77 वर्ष बाद, गणतंत्र दिवस का यह बदला हुआ स्वरूप साफ संदेश देता है, देश की असली पहचान उसके महलों में नहीं, मेहनत करने वाले हाथों में बसती है।














