Kohramlive : जम्मू-कश्मीर की शांत वादियों में, पहाड़ों के बीच छिपा एक छोटा-सा खड्ड अब पूरी दुनिया की नजरों में आ गया है। Geological Survey of India (GSI) ने गुरयुल खड्ड को भू-विरासत स्थल (Geo Heritage Site) घोषित किया है। यह कश्मीर का पहला और भारत का 35वां भू-विरासत स्थल है, एक ऐसी जगह जो 25 करोड़ साल पुराने पृथ्वी के इतिहास को अपने सीने में संजोये बैठी है। वरिष्ठ भूविज्ञानी प्रो. जी.एम. भट के हवाले से मीडिया में आई खबरें के अनुसार, 252 मिलियन वर्ष पहले, पृथ्वी पर समुद्री जीवन का 95% और स्थलीय जीवन का 75% एक साथ मिट गया था। इस ‘महाविलुप्ति’ की गवाही देता है गुरयुल खड्ड, श्रीनगर के खानमोह इलाके में स्थित यह घाटी वैज्ञानिकों के लिए जीवाश्मों का खजाना है। यह स्थल सिर्फ पत्थर नहीं, पृथ्वी के धड़कते दिल की कहानी है।” स्थानीय खनन और औद्योगिक गतिविधियों से इस स्थल की विरासत को खतरा है। लेकिन गांववाले और शोधकर्ता मिलकर इसके संरक्षण में जुट गये हैं। उनका मानना है, गुरयुल सिर्फ कश्मीर की धरोहर नहीं, पूरी मानवता की विरासत है।
विश्व मंच पर चमकने की तैयारी
भारत का पहला भू-विरासत स्थल जो कश्मीर में मिला। वैश्विक शोध और पर्यटन का आकर्षण केंद्र बनने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हो सकता है। गुरयुल खड्ड सिर्फ भूगोल नहीं, एक कहानी है, हमारी पृथ्वी के संघर्ष की, जीवन के पुनर्जन्म की। आने वाली पीढ़ियों के लिए यह एक जीवंत प्रयोगशाला और अमूल्य धरोहर होगी।






