UP : मथुरा के होली गेट की गलियों में रविवार की रात वो शोर गूंजा, जो किसी बारात के ढोल-नगाड़ों का नहीं, बल्कि टूटी उम्मीदों की कराह का था। सूरत से सजी-संवरी आई दुल्हन ने सात फेरों के दो घंटे बाद ही रिश्ते की डोर तोड़ दी। वजह थी, वो चमक जो उसके जेवरों में नहीं, सच्चाई में खो गई थी। चार दिन से होटल में ठहरा दुल्हन पक्ष सपनों में रंग भर रहा था। मथुरा में शादी, कानपुर का दूल्हा और रिश्ते की नींव ‘शादी डॉट कॉम’ की स्क्रीन पर रखी गई थी। सब कुछ फिल्मी लग रहा था, जब तक दुल्हन के लिए लाई गई पोटली नहीं खुली।
पोटली खुली तो रहस्य भी खुल गया। जेवरों की जगह खाली थाल थी। दूल्हे की मां ने सहज स्वर में कहा “हमने जेवरों का वादा ही कब किया था।” बस, यहीं से प्यार की जगह इल्ज़ामों ने ले ली। दुल्हन पक्ष को पता चला कि दूल्हा मथुरा में खुद का नहीं, किराये का घर लिये बैठा है। नौकरी भी वो नहीं, जैसी तस्वीर खींची गई थी। इस पर लड़की के घरवाले आगबबूला हो गये। होटल की दीवारें चीखों और थप्पड़ों की आवाज़ों से भर गईं। दूल्हे के कपड़े फाड़ दिये गये और रातभर उसे बंधक बनाकर रखा गया। खर्चे की भरपाई की मांग पांच लाख से शुरू हुई, पर सौदा दो लाख पर जाकर थमा। सुबह जब सूरज निकला, तो बरात खाली हाथ लौट रही थी। माथे का सिंदूर बह चुका था, और सूरत से आई वो दुल्हन खामोश बैठी थी। जैसे किसी ने उसके सपनों की गठरी खोलकर उसमें से भरोसा निकाल फेंका हो। दूल्हा अब भी कहता है “मैंने तो सब बताया था…” पर अब कौन सुने? क्योंकि रिश्ते जब स्क्रीन पर बनते हैं, तो सच्चाई का चेहरा कई बार ‘लॉग इन’ नहीं होता।










