Varanasi : चैत की एक शांत संध्या बेला, गंगा किनारे की हवा में तुलसी के मंत्रों की गूंज थी, पर उस दिन वाराणसी की हवाओं में कुछ अशुभ सरसराया। उस शाम खजुरी मोहल्ले की 19 साल की लड़की, अपनी सहेली से मिलकर लौट रही थी। तभी अचानक, भीड़ से निकल कर सामने आया राज विश्वकर्मा। चेहरे पर शालीनता का नकाब और जुबान पर मिठास की चाशनी। “अरे! तुम यहां अकेली? चलो, मैं एक कैफे जानता हूं, सुरक्षित है, आराम कर लो,” उसने कहा। मासूम लड़की झिझकी, पर उसकी आंखों में न कोई डर था, न शक। वो चल दी उसके साथ… लहरतारा के पास एक सुनसान कैफे, जहां दीवारों पर अंधेरे की परछाइयां झूल रही थीं। अंदर पहुंचते ही उस नकाबपोश ने असली चेहरा दिखाया। रातभर कैफे के सन्नाटे में उसकी चीखें गुम हो गईं। पर यह तो शुरुआत थी… सुबह होते ही राज ने उसे अन्य दरिंदों के हवाले कर दिया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…ये तो बस पहला पन्ना है उस खौफनाक किताब का, जिसकी हर अगली स्याही… और भी काली है। उसकी आंखों में रात की नींद नहीं, बल्कि एक आग थी, जिसने उसके विश्वास, उसकी अस्मिता और उसके स्वाभिमान को राख कर दिया था। “हम तुम्हें घर छोड़ देंगे,” समीर ने कहा… और फिर वही, धोखा। हाईवे पर, गाड़ियों के शोर और हवा की सरसराहट के बीच, समीर और उसके साथी ने बाइक पर ही उसके साथ अमानवीय हरकत की। चीखें हवा में घुल गईं, सुनने वाला कोई नहीं था। फिर उसे नदेसर की ओर फेंक दिया गया, जैसे कोई टूटी हुई चीज। वहां से शुरू हुआ दूसरा खेल, अब लड़की केवल एक इंसान नहीं रही, वह ‘शिकार’ बन चुकी थी। 31 मार्च की शाम, एक नया नाम सामने आया — आयुष। “चलो, थोड़ा घूमने चलते हैं,” आयुष बोला, उसके साथ थे सोहेल, दानिश, अनमोल, साजिद और जाहिर। लड़की को ले जाया गया सिगरा स्थित ‘कंटिनेंटल कैफे’ में, उस दिन वहां जो हुआ, वह नरक से भी भयावह था। कोल्ड ड्रिंक में नशीली चीजें मिला और फिर लड़की को जब होश आया, वह अकेली नहीं थी… उसके आसपास छह दरिंदे थे। और फिर… उस कमरे की चारदीवारी, चीखों की गूंज और दरवाजे के बाहर पसरा मौन — हर बार जब वह होश में आती, दुनिया थोड़ी और बेरहम हो चुकी होती। राज, समीर, साजिद, आयुष, जाहिर, दानिश, अनमोल, इमरान, अमन, जैब… और गिनती अभी अधूरी है। इतने नाम, इतने चेहरे… और हर चेहरा उस नर्क का गवाह, जिसकी यातना किसी शब्दों में बयां नहीं हो सकती।
एक मां जब अपनी बेटी को खोजती है और फिर जब वो बेटी टूटी हुई, नशे की हालत में लौटती है… बेटी ने जब जुबां खोली तो मां का कलेजा दरक गया। 19 साल उनकी बेटी के संग सात दिनों तक 23 युवकों ने गैंगरेप किया। युवती को नशा देकर अलग-अलग जगहों पर ले जाकर हैवानियत की गई। दुखियारी मां के बयान पर वाराणसी के लालपुर पांडेयपुर थाने में 12 नामजद और 11 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने फौरी कार्रवाई करते हुये नौ संदेही गुनहगारों को अरेस्ट कर लिया। युवती की मां ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी गत 29 मार्च को घर से अपनी दोस्त के यहां गई थी। वापसी के दौरान रास्ते में उससे राज विश्वकर्मा मिला। फिर जो कुछ होता चला गया, वह जान-सुन सबके आंखों में आंसू छलक आये। मां के मुख से केवल इतना निकला, “क्या मेरी बच्ची को इंसान नहीं मिले? सिर्फ दरिंदे मिले?”








