Hazaribag (Shiv Narayan Sahu): जमीनी की सियासत और कोयले के कारोबार के बीच आज एक बार फिर हजारीबाग का बड़कागांव धधक उठा। बीजीआर कंपनी के समर्थकों का कारवां जैसे ही साइट ऑफिस की ओर बढ़ा, हवा में तनाव की बू फैलने लगी। सूचना आग की तरह गोंदलपुरा गांव पहुंची और देखते ही देखते महिला-पुरुषों की भीड़ साइट ऑफिस के सामने आ डटी। बादम और अंबाजीत गांव के समर्थकों ने जैसे ही मोर्चा संभाला, मामला तू-तू, मैं-मैं से होते हुये गर्मा-गर्म नारेबाजी में बदल गया। कोई BGR को विकास का औजार बता रहा था, तो कोई उसे जमीन हड़पने वाली चालाकी की मिसाल। स्थिति जब बेकाबू होने लगी, तो बड़कागांव पुलिस को उतरना पड़ा मैदान में। सैकड़ों लोगों के बीच तनातनी को किसी तरह थामकर, अधिकारियों ने मामले को शांत किया।
कौन क्या बोला, जानें
BGR समर्थकों का पक्ष है कि “बादम और अंबाजीत के रैयत अपनी जमीन देने को तैयार हैं। फिर गोंदलपुरा वालों का विरोध क्यों? यह विकास में रोड़ा अटकाना है।” वहीं, गोंदलपुरा के ग्रामीणों का दर्द है कि ”कंपनी अब असली रंग दिखा रही है। फूट डालो और राज करो, यही नीति रही है इसकी। आज हमारे भाई ही हमारे खिलाफ खड़े हैं, चंद रुपयों में।”
मामले की जड़ क्या है?
- गोंदलपुरा गांव के लोग बादम कोल खनन परियोजना का लगातार विरोध कर रहे हैं।
- कंपनी के समर्थन में अब पड़ोसी गांवों बादम और अंबाजीत के रैयत खुलकर सामने आ रहे हैं।
- विरोध की आग अब गांवों के बीच विभाजन की रेखा खींच रही है।
तू-तू, मैं-मैं और फिर गरमा गया बड़कागांव…#Hazaribagh #Badkaganw #BGR #company #protest #Jharkhand pic.twitter.com/VTgGM5CgeT
— KohramLive (@KohramLive) May 29, 2025












