“वाह क्या बात है,” ये रांची है, यहां नया साल भी सुकून दे जाता…

spot_img

Published:

📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

Kohramlive : साल बदलने से पहले ही रांची कुछ अलग ही हो जाती है। हवाओं में ठंड की चुभन के बजाये एक मीठी-सी गुदगुदी घुल जाती है। सड़कों पर चलते लोग, चाय की दुकानों पर खड़े युवा, मंदिरों की सीढ़ियां चढ़ते श्रद्धालु, सबकी आंखों में एक ही चमक होती है, नया साल। जैसे ही दिसंबर की आखिरी तारीख करीब आती है, राजधानी रांची की हर मोड़, हर झरना, हर मंदिर मानो कह रहा हो, “रुको, सांस लो और नये साल का स्वागत दिल से करो।” नये साल के स्वागत में रांची के फॉल्स  हुंडरू, दशम, जोन्हा और हिरनी पूरी तरह तैयार है। यहां गिरता पानी केवल चट्टानों से नहीं टकराता, बल्कि लोगों की सालभर की थकान, दर्द और अधूरी ख्वाहिशों को भी बहा ले जाता है। परिवारों की हंसी, दोस्तों की शोरगुल, मोबाइल कैमरों की क्लिक और बीच में झरने की गूंजती आवाज, ऐसा लगता है मानो प्रकृति खुद कह रही हो, “चलो, पुराने साल को यहीं छोड़ दो, हैप्पी न्यू ईयर।” रांची का नया साल केवल मस्ती नहीं, आस्था से भी शुरू होता है। रजरप्पा का छिन्नमस्तिका मंदिर, जगन्नाथपुर मंदिर, देवड़ी और पहाड़ी मंदिर, काली मंदिर, संकट मोचन, साई मंदिर, इन जगहों पर नये साल की पहली सुबह अलग ही रंग लिये होती है। घंटी की आवाज, अगरबत्ती की खुशबू और आंखें बंद कर मांगी गई दुआ भगवान से नहीं, खुद से वादा करने आते हैं, “इस बार और बेहतर बनेंगे, इस बार हार नहीं मानेंगे।” वहीं, जैसे ही शाम ढलती है, राजधानी की सड़कों पर रौशनी उतर आती है। रांची के कोकर, मेन रोड, लालपुर, मोरहाबादी, कांके रोड, हरमू, स्टेशन रोड, हर जगह कैफे, रेस्टोरेंट और ढाबों में नई साल की धड़कन सुनाई देने लगती है। कहीं धीमा म्यूजिक, कहीं दोस्तों की ठहाके, तो कहीं परिवार के साथ सादा-सा डिनर, रांची की खूबी यही है, यह शोर में भी सुकून देना जानती है। पहली जनवरी की सुबह हल्की धूप, ठंडी हवा और सड़कों पर टहलते लोग। कोई मॉर्निंग वॉक पर, कोई मंदिर की ओर तो कोई झरनों की राह पकड़ चुका होता है। उस पल लगता है, नया साल कैलेंडर में नहीं, दिल में उतरा है। नये साल के आगाज पर रांची भागने नहीं कहती, वह ठहरने का हुनर सिखाती है। यह शहर शोर नहीं करता, यह हौले-हौले दिल में उतरता है और जब कोई यहां से लौटता है, तो उसके मुंह से अपने आप निकल पड़ता है, “वाह क्या बात है… ये रांची है, यहां नया साल भी सुकून दे जाता है।”

 

Latest News

Related articles

Recent articles