UP : बेशक, घटना छोटी हो या बड़ी या फिर अपने जीवन से जुड़े हर पल का वीडियो आज के जमाने में सोशल मीडिया पर वायरल होते रहता है। पोस्ट साझा करते रहते हैं। ऐसे स्थिति में जहां अनगिनत भीड़ हो और बाबा के प्रवचन का एक भी साफ वीडियो का सामने नहीं आना, सहसा चौंका गया। हाथरस की घटना पर कई जुबां पर एक ही सवाल, ऐसा कैसे हो सकता है, क्या इन वीडियो को जानबूझकर रोका गया? स्थानीय लोगों और कुछ चश्मदीदों ने मीडिया को जो कुछ बयान दिया है, उसमें बेहद चौंकाने वाली बातें सामने आई है। मीडिया को बताया गया कि साकार हरि बाबा की अपनी लंबी-चौड़ी फौज है। इनका हुलिया और पोशाक किसी अनुशासित बस जैसा दिखाई देता है। इन्हें सेवादार के नाम से जाना जाता है। इनमें कई महिलाएं भी हैं। हादसे के बाद बाबा की फौज अंदर और बाहर दोनों जगह एक्टिव हो गये। जो कोई शख्स वीडियो बना रहा था, उसे रोका-टोका और पीटा गया। कुछ के फोन छिन लिये गये। वहीं, पुलिस को भी अंदर घुसने से रोका गया। पर, पुलिस ने अपना काम बेखूबी किया। घायलों को हॉस्पिटल ले जाने में जुटे रहे। आलम यह था कि हादसे में लोग मरते रहे और सेवादार भागते रहे। पुलिस ने जब पूरी सख्ती से मोर्चा संभाल लिया तो सभी सेवादार वहां से भाग निकले।
कुछ लोगों का कहना है कि बाबा के प्रति उनके भक्तों में गजब की भक्ति है। उनके चरण की धूल तक लेने के लिये भक्तों में बेचैनी छाई रहती है, वहीं उनके आश्रम में लगे नल का पानी लेने के लिये भी लंबी लाइन लगती है। भक्तों में मान्यता है कि उनके आश्रम में लगे नल के पानी से रोग और कष्ट दूर हो जाते है। सिपाही की नौकरी छोड़ अध्यात्म से जुड़े साकार हरि बाबा के सत्संग में शामिल होने के लिये लोग दूर-दूर से उनके आश्रम में आते हैं। उनकी पत्नी माताश्री के नाम से मशहूर है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कभी खुफिया सूचनाओं के संग्रह का जिम्मा संभालने वाले सूरजपाल सिंह का विभाग से ऐसा मोह भंग हुआ कि वह अध्यात्म की ओर चले गये। साल 1999 में अपने गांव के ही घर को आश्रम बना दिया और यहां सत्संग शुरू कर दिया। पटियाली क्षेत्र के बहादुरनगर में रहनेवाले सूरजपाल सिंह देखते ही देखते ”भोले बाबा” के नाम से मशहूर हो गये। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन्हें कोई संतान नहीं है। उनके सत्संग में लोग अपना दुख-दर्द लेकर आने लगे। वहीं, बाबा अपने हाथों का स्पर्श करके बीमारियां दूर करने का दावा करते रहे। सत्संग और चमत्कार के मोह में उनके अनुयायियों का कारवां बढ़ता चला गया। गुजरे ढाई दशक की यात्रा में उनके न जाने कितने अनुयायी हो गये। बाबा के अनुयायी उनके प्रति कट्टर भी हैं, कोई भी बाबा की आलोचना सुनना पसंद नहीं करता है।
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