Hazaribagh (Shiv Narayan Sahu) : धूप की तपिश से तपते बड़कागांव, केरेडारी और चुरचू के जंगलों में इन दिनों आग कोयले की नहीं, लाशों की जल रही है। झारखंड की धरती, जो एक समय क्रांति की जननी थी, आज अवैध खनन के जहर से कराह रही है। सुरंगों जैसी खदानें, जिनका कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं, लेकिन जिनमें पसीना नहीं, खून बहता है। लुरुंगा की खामोश रात में जब मजदूर संदीप और हफीज की लाशें बाहर आईं, खावा जंगल की स्याह सुबह में जब तीन गरीब मजदूरों की सांसें दम तोड़ गईं, तब भी कोई सरकार, कोई तंत्र, कोई अफसर नहीं जागा। सूत्रों की मानें तो “तस्करी के इस महाधंधे में सत्ता के कुछ साये भी शामिल हैं। ”जिनकी चुप्पी बताती है कि या तो वो बेबस हैं या हिस्सेदार! अब उम्मीद बंधी है दो नये किरदारों से उपायुक्त और पुलिस कप्तान, जिनके हाथ में अब हजारीबाग की नब्ज है।
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— KohramLive (@KohramLive) May 28, 2025








