कोहराम लाइव डेस्क : हमारे समाज में सफेद दाग की बीमारी को लेकर अनेक प्रकार की ऐसी धारणाएं भी प्रचलित रही हैं, जिनके कारण इस बीमारी के प्रति सही समझ और इलाज को लेकर सतर्कता का अभाव दिखता है। यह भी सुना जाता है कि यह बीमारी छूआछूत से फैलती है। कुछ खास चीजें जैसे मछली और दूध का एक साथ सेवन करने से यह बीमारी होती है। इस तरह के सवालों के पचड़े में न जाकर हमें यह समझना होगा कि विटिलिगो यानी त्वचा के सफेद दाग के क्या कारण हैं और इसका कारगर इलाज कैसे हो सकता है।
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सफेद दाग क्या है, क्यों होता है यह
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूरी दुनिया में सफेद दाग की बीमारी 1 से 2 प्रतिशत लोगों को होती है और यह एक ऑटोइम्यून बीमारी (Autoimmune Disease) है, जो गैर-संक्रामक भी है यानी छूने से फैलती नहीं है। ऑटोइम्यून का मतलब है कि शरीर की इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बैक्टीरिया, वायरस के खिलाफ काम करने के अलावा अपने ही शरीर के कुछ सेल्स को मारने लगती है। हमारे शरीर में मेलेनोसाइट्स नाम के सेल्स होते हैं। विटिलिगो या सफेद दाग की इस बीमारी में शरीर की इम्यूनिटी इन मेलेनोसाइट्स सेल्स को मारने लगती है। जब मेलेनोसाइट्स नहीं होगा तो स्किन में मेलनिन नहीं बनेगा और स्किन के जिस हिस्से में मेलनिन नहीं होगा, वहां पर सफेद दाग बन जाएंगे।
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जटिल है इलाज की प्रक्रिया
मेडिकल साइंस में इस बीमारी का लंबे समय तक इलाज चलता है।यह लाइलाज नहीं है, फिर भी ठीक होने की प्रक्रिया जटिल है। यह माना जाता है मौजूदा समय में विटिलिगो या सफेद दाग की इस बीमारी का कोई निश्चित इलाज मौजूद नहीं है और ना ही इस बीमारी से बचने का कोई उपाय मौजूद है। बीमारी के इलाज में डॉक्टर स्किन में दोबारा पिग्मेंट डालने की कोशिश करते हैं और पिग्मेंटेशन यानी रंजकता को होने से रोकते हैं, ताकि स्किन पर इसका और अधिक प्रभाव न दिखे। स्किन को होने वाले नुकसान और पिग्मेंटेशन से बचने के लिए सूरज की रोशनी में कम से कम रहना ही बेहतर होगा। त्वचा के रंग को फिर से पहले जैसा करने के लिए भी इलाज के कुछ तरीके मौजूद हैं, लेकिन ये सभी लोगों पर एक समान तरीके से काम नहीं करता।
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