Delhi : नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आज अचानक नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहुंच गये। बिना किसी तामझाम के, चुपचाप कुलियों और यात्रियों के बीच जाकर बैठ गये। कुछ दिन पहले इसी स्टेशन पर भगदड़ मची थी, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। राहुल गांधी इन्हीं जख्मों को महसूस करने और जिंदगियों की परवाह करने पहुंचे थे। वह धीरे-धीरे आगे बढ़े, कुलियों से मिले, यात्रियों से बातचीत की। उन हाथों को थामा, जो रोज सैकड़ों यात्रियों का बोझ उठाते हैं। वही हाथ, जिन्होंने कुछ दिन पहले भगदड़ में फंसे मासूमों को बचाने के लिये अपने दुख-दर्द को भुला दिया था।
भगदड़ की चीखें अब भी इस स्टेशन की दीवारों में बसी हुई थीं। 15 फरवरी की वह रात, जब भीड़ ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया था। 18 जिंदगियां अंधेरे में समा गई थीं। लेकिन इसी अंधकार में कुछ हाथ इंसानियत की लौ जलाने आगे आये थे—ये कुली ही थे, जिन्होंने अपनी परवाह किये बिना न जाने कितने लोगों को बचाया। राहुल गांधी ने न केवल उनका हाल जाना, बल्कि उनकी कहानियां सुनीं—संघर्ष, दर्द, और उम्मीद की कहानियां। उन्होंने कहा, “अंधकार के बीच इंसानियत की रोशनी ही सच्चा उजाला होती है।” राहुल ने सरकार से उम्मीद जताई कि वह हर वर्ग के यात्री की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठायेगी। कुली दीपेश मीना बोले, “हमें खुशी है कि कोई हमारी सुनने आया। हमें उम्मीद है कि हमारी परेशानियां अब सच में हल होंगी।” राहुल गांधी करीब 40 मिनट तक स्टेशन पर रूके।
राहुल ने एक्स पर किया पोस्ट
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल X पर एक पोस्ट किया और लिखा अक्सर सबसे अंधकार भरे समय में ही इंसानियत की रोशनी सबसे ज़्यादा चमकती है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ के दौरान कुली भाइयों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुये कई यात्रियों की जान बचाई थी। इसके लिए मैंने देशवासियों की ओर से आज उनका धन्यवाद किया।
अक्सर सबसे अंधकार भरे समय में ही इंसानियत की रोशनी सबसे ज़्यादा चमकती है।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ के दौरान कुली भाइयों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए कई यात्रियों की जान बचाई थी। इसके लिए मैंने देशवासियों की ओर से आज उनका धन्यवाद किया।
लेकिन ऐसे हादसों से सीख लेना… pic.twitter.com/w4DHfrGEdH
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 1, 2025








