Ranchi (Neeraj Thakur) : झारखंड में नक्सलवाद की टिमटिमाती लौ हौले-हौले बुतने पर है। नेक और मजबूत इरादों का नतीजा यह रहा कि ”ऑक्टोपस” की तेज हवा में बूढ़ा पहाड़ ढह गया। फतह हासिल कर पुलिस ने वहां झंडा फहरा दिया। वहीं ”डबल बुल” ऑपरेशन की आंधी में बुलबुल जंगल से उग्रवाद हवा-हवाई हो गया। नक्सलियों का हेड क्वार्टर बूढ़ा पहाड़ नक्सल मुक्त हो गया। अब यहां नक्सलियों के बंकर की जगह पुलिस का तंबू गड़ गया। जब कभी बूढ़ा पहाड़ या बुलबुल जंगल में नक्सलियों की ताकत को कम करने की बातें सामने आयेगी, सहसा, धीर-गंभीर DGP नीरज सिन्हा और IG अमोल वेणुकांत होमकर लोगों को जरूर याद आयेंगे। जब ये दोनों तेज-तर्रार IPS ने अपनी कमान संभाली, तब कोई लंबी-चौड़ी बड़ी घोषणा नहीं की थी, बस बखूबी रिजल्ट दिखाते चले गये।
बूढ़ा पहाड़ का नाम सुनते ही लोग कांप उठते थे लोग
एक जमाना था जब बूढ़ा पहाड़ का नाम सुनते ही लोग कांप उठते थे। यहीं से नक्सलियों की अपनी हुकूमत चलती थी। मजाल नहीं था कि तब कोई शख्स पुलिस को बूढ़ा पहाड़ का राह दिखाये। नक्सलियों के आतंक की धार ने झारखंड के सीने में कई गहरे जख्म दिये। 302 से ज्यादा खाकी शहीद हो गये। इसमें दो IPS भी शामिल थे। युवा IPS अजय कुमार सिंह की शहादत के बाद उनकी IPS पत्नी आराधना का रोना सबको रूला गया था। तब आराधना रांची की सिटी एसपी थीं, वहीं उनके पति अजय लोहरदगा के एसपी थे।
हर मोर्चे पर पुलिस का बुलंद रहा इकबाल
गुजरे 22 साल में जो काम नहीं हो सका, वो गुजरे चंद सालों में हो गया। हर मोर्चे पर पुलिस का इकबाल बुलंद रहा। केवल इस साल 372 नक्सलियों को सलाखों के पीछे डाला गया। 12 खूंखार को इनकाउंटर में मार गिराया गया। पुलिस के कड़े तेवर से डर कर 16 नक्सलियों ने अपने हथियार डाल दिये। इसमें महाराज प्रमाणिक, सुरेश सिंह मुंडा, विमल यादव, विमल लोहरा, अभय, भवानी सिंह खेरवार एवं कुलदीप गंझू जैसे कुख्यात नक्सली शामिल है। 2022 में झारखंड पुलिस ने 3 सैक मेंबर, 04 जोनल कमांडर, 07 सब जोनल कमांडर और 16 एरिया कमांडर को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। पुलिस से लूटे गए 45 हथियार भी बरामद किए गये। उम्दा किस्म के कुल 171 हथियार मिले। इसमें एके-47 भी शामिल है।
टारगेट बेस पर ताबड़तोड़ कार्रवाई करने का मन बना रही झारखंड पुलिस
2022 के पूरे साल का लेखा-जोखा तैयार किया जा रहा है। साल खत्म होने की राह पर है। नये साल का आगाज नये अंदाज में करने को बेताब झारखंड पुलिस अब टारगेट बेस पर ताबड़तोड़ कार्रवाई करने का मन बना रही है। छोटे-बड़े खुराफातियों और समाज के दुश्मनों को टारगेट कर उनकी रीड की हड्डी तोड़ने की तैयारी है। इसमें ATS ज्यादा एक्टिव है। छोटे-बड़े गैंगस्टरों के इनकम सोर्स पर तीखी चोट जारी है। बिल में छुपे क्रिमिनलों को चुन-चुन कर बाहर निकाल उसे काल कोठरी में डाला जा रहा है।
छुप-छुपाकर जिंदगानी बिताने वाले अब दूसरे धंधे में मस्त
ऐसा भी नहीं है कि झारखंड से उग्रवाद या अपराध का खात्मा हो गया। नक्सलियों के उखड़ते पांव अब अपराध के दलदल में धंसते जा रहे। कल तक बीहड़ों में छुप-छुपाकर जिंदगानी बिताने वाले अब सफेदपोश की छांव तले बेखौफ अपना चोला बदल दूसरे धंधे में मस्त हैं। कोई कोयला के धंधे में तो कोई जमीन में तो कोई शराब और नशे के कारोबार में मग्न है। फर्क सिर्फ इतना पड़ा कि जंगल में जानवर है, पर खैरियत से है। शहर में जिंदगी खतरे में है। महिला अत्याचार की फाइल मोटी होती जा रही है। जहां-तहां बढ़ते अपराध पर लगाम लगाने को लेकर पुलिस हांफ रही है। पुराने ऐसे कई दागदार चेहरे हैं, जिनकी अवैध कमाई शहर में खड़ी बड़ी-बड़ी इमारतों और होटलों में लगा रखी है। राजधानी रांची में एक होटल का फीता काटा गया, इसमें किसका पैसा लगा, केवल यह झांक लिया जाये तो कई सफेदपोश चेहरे बेनकाब हो जायेंगे। धनबाद के 2 कोयला माफियाओं के पैसे से राजधानी रांची में बड़ा खेल हो रहा है। एक अमित अग्रवाल पहले से ED के पंजे में आकर कराह रहा है। अबकी 2 अन्य की बारी है।
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