Ranchi : झारखंड सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ जंग तेज कर दी है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से न्यायिक अकादमी, रांची में एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका विषय था, “बाल विवाह मुक्त झारखंड”। यह पहला अवसर था जब राज्य के सभी SDO और DSWO को बाल विवाह निषेध अधिकारी (CMPO) के रूप में प्रशिक्षित किया गया। इस पहल के माध्यम से झारखंड सरकार ने 2025-2030 तक बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त करने के लक्ष्य की ओर पहला ठोस कदम बढ़ाया है।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि की हैसियत से मौजूद मुख्य सचिव अलका तिवारी ने कहा,”आजादी के 79 साल बाद भी बाल विवाह पर चर्चा करना बेहद दुखद है। हमारे पास कानून हैं, पर जरूरत है उन्हें जमीन पर उतारने की।” सचिव मनोज कुमार ने बेटियों की शिक्षा, जीवन कौशल और आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुये कहा कि “बेटी जब शिक्षित होगी, तभी समाज सशक्त होगा।” कार्यक्रम का संचालन परियोजना निदेशक किरण पासी के नेतृत्व में हुआ। UNICEF, ICRW, C3, AVA और YUVA जैसे संस्थाओं की भागीदारी ने इसे और व्यापक बना दिया।
कार्यशाला में झारखंड के बाल विवाह की भयावह तस्वीर भी सामने आई, राज्य में बाल विवाह की दर 32.2% है, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। विशेष रूप से संताल परगना के जिले जैसे जामताड़ा, देवघर, गोड्डा सबसे अधिक प्रभावित हैं। इस अवसर पर 10 बहादुर किशोरियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने न सिर्फ अपना बाल विवाह रोका, बल्कि कई और बच्चियों को भी नई जिंदगी दी। कार्यक्रम में 34 SDO, 9 DSWO, 39 NGO प्रतिनिधि, और 14 मीडिया कर्मी समेत करीब 130 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला के अंत में “बाल विवाह मुक्त झारखंड” के लिये राज्य कार्य योजना पर सहमति बनी।
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