Ranchi : राजधानी रांची की तंग गलियों में पान की दुकानों पर भीड़ लगी थी। शाम के धुंधलके में लाल-पीले रंग के चमकीले पाउच हवा में लहराते थे—जैसे किसी ने आग की लपटें लटका दी हों। “भइया, दो कमला पसंद देना।”—किसी युवा की आवाज़ उभरी। गुटखा उसके हाथ में पहुंचा और अगले ही पल होठों के नीचे दब गया। लेकिन वह युवा इस खबर से अनजान था कि यह स्वाद, यह नशा, उसकी जिंदगी को धीरे-धीरे चबा रहा है।
झारखंड सरकार ने जब गुटखा और पान मसाले पर पाबंदी लगाई थी, तब लगा था कि यह धीमा जहर अब बाजार से गायब हो जायेगा। लेकिन यह तो बस कागजी घोषणा थी। हकीकत यह थी कि शहर की हर नुक्कड़ पर, हर पान की दुकान पर, गली-कूचों में, यहां तक कि नामचीन बाजारों में भी गुटखे की सप्लाई बेरोकटोक बेखौफ जारी है। झारखंड प्रदेश चंद्रवंशी महासभा और श्री महावीर मंडल पूर्वी क्षेत्र के अध्यक्ष बजरंग वर्मा ने इस खुलासे से सरकार की नींद उड़ा दी कि प्रतिबंध के बावजूद ट्रकों में भरकर झारखंड के हर जिले में यह धीमा जहर पहुंचाया जा रहा है और सबसे दुखद पहलू यह कि सरकार खुद इन ट्रकों से GST वसूल रही है। बजरंग वर्मा ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इस पर रोक नहीं लगाई, तो महासभा सड़कों पर उतरेगी, धरना-प्रदर्शन करेगी और अंततः न्यायालय का दरवाजा खटखटायेगी।
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