Ranchi : 1855 की वह चिंगारी, जिसने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी, आज भी झारखंड की मिट्टी में जल रही है। हूल आंदोलन के महानायक, स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत सिदो-कान्हू, चांद-भैरव जो कभी अपने आदिवासी समाज की रक्षा से पीछे नहीं हटे, आज भी इस धरती की आत्मा बने हुये हैं। आज दिल्ली में उसी आत्मा को नमन करते हुये, झारखंड के CM हेमंत सोरेन ने इन वीर सपूतों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। यह केवल एक रस्म नहीं थी, यह इतिहास के सामने नतमस्तक होने का क्षण था।
“हूल” सिर्फ आंदोलन नहीं, एक चेतना थी
CM ने जिस श्रद्धा से वीरों को स्मरण किया, वह यह याद दिलाता है कि हूल सिर्फ इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि आज भी इस राज्य की चेतना का आधार है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, रामगढ़ विधायक ममता देवी, टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो, सारठ विधायक उदय प्रताप सिंह उर्फ चुन्ना सिंह, खिजरी विधायक राजेश कच्छप और पूर्व विधायक के एन त्रिपाठी भी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर उस स्मृति को सम्मानित किया, जो झारखंड के अस्तित्व की बुनियाद है।
Delhi: Jharkhand Chief Minister Hemant Soren says, “Today, this day is known as Hul Diwas. Along with Jharkhand, this day is being observed in various states across the country, by tribal communities and other sections of society…” pic.twitter.com/CcfS69Tmx8
— IANS (@ians_india) June 30, 2025














