याराना हुआ लहूलुहान, देखें क्या बोले SP

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Ranchi (Pawan Thakur) : कानों-कान थानेदार विपुल ओझा तक एक खबर आई, जो उनकी बेचैनी बढ़ा गई। उन्हें बताया गया- उसके लाइफ में कोई नहीं था, ना बीवी और न बाल-बच्चा। बिल्कुल अकेला है। भाड़े के एक मकान में रहता है। मशहूर बीआईटी मेसरा संस्थान से रिटायर हुआ था। ज्यादातर समय उसका घर में ही बीता करता था। घर में दोस्तों का आना-जाना लगा रहता था। अचानक घर से गायब है। रिटायरमेंट के बाद उसे अच्छा-खासा पैसा भी मिला है। मिली खबर ने थानेदार की बेचैनी बढ़ा रखी थी। वहीं उनकी नींद भी उड़ गई थी। पता नहीं क्यों उन्हें लग रहा था कि कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है। तब थानेदार ने यह जानकारी हौले से रांची के पुलिस कप्तान किशोर कौशल को दी। उन्हें भी संदेह हुआ। थानेदार विपुल को आदेश दिया कि गंभीरता से चेक करो… कुछ क्लू मिले तो बताओ।

टेक्निकल सेल और गुप्तचरों से मिली सूचना से यह पता चला कि गुजरे 19 जुलाई की रात शंकर महतो ने अपने यार सुप्रियो कुमार दास को अपने घर पर बुलाया था। खाना खाने के बाद उन्हें छोड़ने के बहाने घर से साथ निकला। घर से ही कुछ दूर हौले से एक ब्लू कलर की मारुती वैन वहां खड़ी थी। JH01X-2971 नंबर की मारूती वैन में बैठे अनिल कुमार मिश्रा उर्फ अमित मिश्रा उर्फ लिंडा और भोला कुमार ने शंकर को टोका। अरे यार कहां जाना है… चलो पहुंचा देते हैं। शंकर ने पहले ना नुकुर किया कि नहीं खुद चले जाएंगे। पर फिर दास को लेकर वैन में बैठ गया। दास सबकुछ से बेखबर थे। यारों की यारी तब लहूलुहान हो गई, जब दास को पता चला कि उनका किडनैप कर लिया गया है। सुप्रियो दास को किडनैप कर राजा डेरा गांव में ले जाया गया। वहां शंकर अपना घर बना रहा है। इस घर में अपहृत दास को बांध कर रख दिया गया। टॉर्चर भी किया जाने लगा।

पहला मोबाइल बंद मिला तो यकीन में बदला शक

थानेदार विपुल ओझा शंकर महतो की टोह में लग गये। शंकर ने अपना पहला मोबाइल भी बंद कर रखा था। तब उनका शक यकीन में बदल गया कि मामला जरूर कुछ गड़बड़ है। एक बार फिर से थानेदार ने पूरे मामले के बारे में अपने पुलिस कप्तान किशोर कौशल को सबकुछ बताया। तेज तर्रार IPS किशोर कौशल को भी समझने में देर नहीं लगा कि यह मामला किनैपिंग फॉर रैनसम है। उन्होंने सिटी एसपी अंशुमान कुमार की देखरेख में एक टीम बनाई। गठित टीम में सदर थानेदार इंस्पेक्टर श्याम किशोर महतो, मेसरा थानेदार विपुल ओझा, अनगड़ा थाना के सब इंस्पेक्टर रितेश लकड़ा, टेक्निकल सेल के एएसआई बलेंद्र सिंह, एएसआई प्रभुवन कुमार और संतोष कुमार को रखा गया। महतो के लीडरशिप में जांच की दिशा दशा आगे बढ़ी। अपहृत दास का बैंक अकाउंट खंगाला गया। पाया गया कि घटना के बाद उनके अकाउंट से 4 लाख से ज्यादा रुपये निकाले गये हैं। यह सारे पैसे चेक के माध्यम से निकाले गये। दास को टॉर्चर कर इस चेक पर दस्तखत कराया गया था। इसके बाद पुलिस ने शंकर महतो को उठा लिया। पूछताछ में वह टूट गया। अपना गुनाह कबूल कर लिया। शंकर की निशानदेही पर राजाडेरा गांव के एक निर्माणाधीन मकान से अपहृत दास को सही सलामत मुक्त करा लिया गया। मौके पर पहरेदारी कर रहे अनिल मिश्रा और भोला कुमार को भी दबोच लिया गया। यह गांव राजधानी रांची के अनगड़ा थाना क्षेत्र में है।

गिरफ्तार शंकर महतो ने पुलिस के सामने यह राज उगला कि जब उसे पता चला कि उसका यार रिटायर हो गया और उसे खूब पैसा मिला, तब उसने यह खतरनाक इरादा बना लिया। शंकर भी मेसरा में काम करता है। जिस कारण दास की कुंडली के बारे में वह जानता था। खाने पर बुलाकर खतरनाक ढंग से पूरे घटना को अंजाम दिया। सुनें क्या बोले रांची के सिटी एसपी अंशुमान कुमार…

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