New Delhi : झारखंड की मिट्टी से निकले वे सच्चे सिपाही बीएलओ, पर्यवेक्षक, अधिकारी और बूथ स्तरीय स्वयंसेवक आज लोकतंत्र की राजधानी दिल्ली में कुछ ऐसा अनुभव कर लौटे, जिसे वे शायद जीवनभर नहीं भूल पायेंगे। भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (IIIDEM) में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन उन्होंने मशीन पर वोट डालने का ‘जीता-जागता अनुभव’ पाया, वहीं, उन्हें दिल्ली की आत्मा को छूने का अवसर भी मिला।
राष्ट्रपति भवन की गरिमा, इंडिया गेट की शहादत, संसद भवन की गूंज और राष्ट्रीय संग्रहालय की विरासत , सबने इन लोकतंत्र के रक्षकों के मन में नया जोश भरा। किसी ने पहली बार राष्ट्र की राजधानी को इतने नजदीक से देखा था तो कोई उस ईवीएम को छूकर भावुक हो उठा, जिससे करोड़ों की आवाज निकलती है। IIIDEM के प्रशिक्षकों ने जब उन्हें ईवीएम, वीवीपैट, लाइन मैनेजमेंट और मतदाता अनुभव के बारे में बारीकियों से बताया, तो मानो हर एक सहभागी के भीतर का सेवक जाग उठा। इन दो दिनों में उन्होंने सिर्फ प्रशिक्षण नहीं पाया, बल्कि लोकतंत्र की भावना को अपने भीतर उतार लिया। BLO से लेकर DEO तक, हर किसी की आंखों में वही चमक थी,”अब गांव-गांव जायेंगे, वोट की ताकत का गीत गायेंगे।” क्योंकि अब ये सिर्फ कर्मचारी नहीं रहे, ये बन चुके हैं भारत के लोकतंत्र के जमीनी देवदूत। झारखंड से 402 प्रतिनिधि एक मकसद के साथ दिल्ली पहुंचे थे।












