Chouparan(Krishna Paswan) : जहां भक्ति का स्वर हृदय को छू जाये, जहां तप का तेज आकाश को आलोकित करे, वहीं होता है संत का वैकुंठ धाम। ऐसा ही स्थल बन चुका है राजागढ़ बिगहा का हनुमंत मंदिर, जहां महंत फलाहारी बाबा की भू-समाधि पर हर वर्ष की तरह इस बार भी 22 मई से त्रिदिवसीय बैकुंठ उत्सव शुरू होने जा रहा है। वह बाबा, जिन्होंने जीवन भर केवल आलू खाकर तप किया, भक्तों की सेवा की और “आलू बाबा” कहलाये, उनकी याद में यह उत्सव अब एक जन-आस्था का पर्व बन गया है।
अनुष्ठान, अखंड रामायण और भंडारा
महंत आनंद चंद्रवंशी के अनुसार, 20, 21 और 22 मई को विशेष अनुष्ठान, श्रीराम चक्रवात वेदी पूजा, अखंड रामायण, हरिकीर्तन और 22 मई को भव्य महाभंडारा का आयोजन होगा। मंदिर के प्रकांड विद्वान मोहित बाबा बताते हैं, “जब कोई आचार्य भू-समाधि को प्राप्त होता है, तब वह स्वयं श्रीविष्णु के स्वरूप में स्थित हो जाते हैं। रामचरितमानस, श्रीमद्भागवत गीता और पुराणों का श्रवण उनकी आत्मा को परम धाम की ओर प्रस्थान कराता है।” बाबा के अंतिम दर्शन के समय, आस्था ने राजनीति को पीछे छोड़ दिया था। पूर्व CM बाबूलाल मरांडी, रघुवर दास, सांसद मनीष जायसवाल, पूर्व सांसद जयंत सिन्हा, विधायक मनोज यादव, पूर्व विधायक किशुन दास सभी ने नतमस्तक होकर बाबा को श्रद्धांजलि दी थी। विधायक मनोज यादव ने विधानसभा में स्वयं पर्यटन विभाग से मंदिर परिसर के विकास की मांग रखी है।
तप, त्याग और निर्माण की गाथा
फलाहारी बाबा ने दो दशक तक ईटखोरी के मां भद्रकाली मंदिर और चौपारण में सेवा दी। उन्होंने कई मंदिरों का निर्माण कराया और तपस्वी जीवन बिताया, केवल आलू खाकर। आज उनकी समाधि स्थल पर हनुमंत सेवा संस्थान ने आदमकद प्रतिमा और मंदिर का निर्माण कर एक तपस्वी को स्थायी श्रद्धांजलि दी है। आयोजन को भव्य बनाने के लिये राजदेव यादव की अध्यक्षता में बैठक हुई जिसमें समाज के कई प्रमुख चेहरे शामिल रहे, हरिश्चंद्र सिंह, रामचंद्र सिंह, गुरुदेव गुप्ता, आशीष सिंह, प्रदीप चंद्रवंशी, बलराम यादव, दीपक कुमार, सचिन और सैकड़ों भक्तों ने मिलकर एक स्वर में संकल्प लिया, “बाबा के वैकुंठ पर्व को श्रद्धा का सबसे सुंदर उत्सव बनायेंगे।”








