Ranchi : राजधानी रांची की सुबह कुछ अलग थी, राजभवन के प्रांगण में सजे गुलदस्तों की खुशबू से ज्यादा सुगंध बिखेर रहे थे विचार और इन विचारों की छांव में बैठे थे वे सभी, जो झारखंड के भविष्य की किताब में सुनहरे अक्षर भरने आये थे। मंच पर विराजमान झारखंड के गर्वनर सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार, जिनकी आंखों में एक शिक्षक का सपना था और दिल में भारत को फिर से तक्षशिला और नालंदा बनाने की तड़प। विषय था, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन और भारतीय ज्ञान परंपरा”।
राज्यपाल ने कहा कि यह शिक्षा नीति सिर्फ दस्तावेज नहीं है, यह भारत को ज्ञान की महाशक्ति बनाने का संकल्प है। उन्होंने आगे कहा कि यह समय समस्याओं पर रोने का नहीं, समाधान गढ़ने का है। झारखंड को भारत का एजुकेशन हब बनाने का हैं। अनिल कोठारी ने शिक्षा को फिर से भारत की आत्मा से जोड़ने की बात की। उन्होंने कहा, “हर विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की भागीदारी से बने टास्क फोर्स, तभी यह नीति जीवंत होगी।” एक ओर भारतीय परिधान की बात हुई, तो दूसरी ओर वोकल फॉर लोकल का मंत्र भी गूंजा। उस मंत्र में छुपा था कौशल, संस्कृति और संकल्प का संगम। कुलपतियों ने अपने-अपने विश्वविद्यालयों के अनुभव साझा किये। कोई नई पाठ्यक्रम संरचना की बात कर रहा था, तो कोई शोध व नवाचार के नये द्वार खोलने को तत्पर था। झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से लेकर कोल्हान, दुमका, हजारीबाग, रांची तक, हर संस्थान ने शिक्षा को सिर्फ भवन नहीं, भावना बनाने की बात कही।








