Ranchi : राजधानी रांची से सटे ओरमांझी प्रखंड के जिदू पण्डारा टोली गांव में सुबह की पहली किरण के साथ ही हांडी-बाल्टी लिये औरतें, बच्चे, बुजुर्ग सब पानी की खोज में भटकते दिखते हैं। घरों में चूल्हा तभी जलता है, जब नल से कुछ बूंदें टपकती हैं। गर्मी अभी ठीक से आई भी नहीं, लेकिन यहां के लोग पहले से ही बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। गांव में दो जलमीनार लगे हैं—एक पंद्रहवीं वित्त आयोग के कोष से बना था, जो बीते छह महीने से खराब पड़ा है। दूसरा हर घर नल जल योजना के तहत लगाया गया, जो नाम तो हर घर जल का है, लेकिन लोगों को मुश्किल से एक से डेढ़ बाल्टी पानी मिल पाता है।गांववालों का कहना है कि जब जलमीनार लगाया जा रहा था, तब उन्होंने ठेकेदार से कहा था कि बोरिंग सही जगह हो, ताकि पानी की कमी न हो। लेकिन ठेकेदार ने उनकी बात अनसुनी कर दी और अब हाल ये है कि बोरिंग में पानी ही नहीं निकलता, टंकी भरती ही नहीं, और नलों में बस नाममात्र की धारा बहती है। सुनें क्या बोले गांवाले...



