Kohramlive : 12 दिन, लहूलुहान शहर… सुलगते आसमान और बिखरे सपने। लेकिन मंगलवार की सुबह, जैसे किसी ने उस चिंगारी को बुझा दिया जिसने पूरे पश्चिम एशिया को राख के किनारे ला खड़ा किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर ईरान और इस्राइल ने एक निर्णायक मोड़ पर युद्ध विराम को मंजूरी दे दी। लेकिन यह फैसला भी तब आया, जब मिसाइलों की आखिरी आवाज़ कई जिंदगियों को खामोश कर चुकी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट करते हुए लिखा, “युद्धविराम अब प्रभावी है। कृपया इसका उल्लंघन न करें…”
बीते कल तेहरान ने कतर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर जवाबी हमला किया था अपने परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के बदले में। इसके बाद इस्राइल पर अंतिम मिसाइलें दागी गईं। जवाब में इस्राइल ने ईरानी शहरों पर रातभर हवाई हमले किये।
ईरान के प्रधानमंत्री नेतन्याहू बोले “हमने युद्ध के अपने सभी लक्ष्य पूरे कर लिए हैं। ईरान के मिसाइल और परमाणु खतरे पर हमने काबू पा लिया है। लेकिन अगर कोई सीमा लांघेगा, तो जवाब भी तय होगा।” सुबह 4 बजे तक दोनों ओर से हमले जारी रहे। बमों की आवाज ने इस्राइली बंकरों को भर दिया और ईरानी अस्पतालों को। और फिर… 7:30 बजे सुबह, ईरान के सरकारी टीवी ने बताया “जंग अब थम गई है।” मीडिया में आई खबरों के मुताबिक ईरान में 974 लोग मारे गये, वहीं इस्राइल में 30 की मौत, हजारों घायल। ट्रंप ने इसे “12 दिवसीय युद्ध” बताया — 1967 के उस ‘छह दिनी युद्ध’ की याद दिलाते हुए जिसने नक्शे बदल दिये थे।
इधर ईरानी विदेश मंत्री की एक पोस्ट ने युद्धविराम को मानवीय मोड़ दिया “अगर इस्राइल हमला रोकेगा, हम भी चुप रहेंगे। लेकिन अगर वो आगे बढ़ा… तो हमारे जवाब की कोई सीमा नहीं होगी।”












