Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा में सालों पहले बोया गया एक जख्म आखिरकार न्याय की किताब में अपना अंतिम अध्याय पा गया। 2016 के एससी/एसटी एक्ट के चर्चित मामले में विशेष अदालत ने शुक्रवार को सात गुनहगारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, सभी को 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। सजा पाने वालों में कांडी थाना क्षेत्र के सननी और कुशहा गांव के राजकुमार यादव, रिंकू यादव, नरेश यादव, सुदामा यादव, नंदू यादव, सुरेश यादव और शिव यादव शामिल है। अदालत ने कठोर चेतावनी दी कि “जातिसूचक अपमान और हिंसा की कोई जगह नहीं।”
क्या था मामला?
साल 2016 में 2 अगस्त को दिन के 10 बजे खुटेहरिया टोला भरत पहाड़ी के सुगन राम अपने परिवार और साथियों के साथ खेत में धान रोपाई की तैयारी कर रहे थे। तभी लाठी, डंडा और टांगी थामे अभियुक्त खेत पर जा पहुंचे। फिर शब्दों ने जहर उगला, “चमार सियार” जैसे जातिसूचक अपशब्दों से गाली-गलौज, खेत जोतने से रोकना और विरोध पर बेरहमी से मारपीट कर दी गई। धान रोपाई की जगह दर्द और लहू के छींटे पड़ गये। इस संबंध में गढ़वा के कांडी थाना में (कांड संख्या 61/2016) में मारपीट, जानलेवा हमला, धमकी से लेकर एससी/एसटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किये गये। लंबी कानूनी प्रक्रिया में 21 साक्षियों की गवाही दर्ज हुई। विशेष न्यायाधीश दिनेश कुमार की अदालत ने
सातों को दोषी ठहराते हुये कहा, धारा 148 में 3 साल का कारावास, धारा 324 में 3 साल का कारावास, धारा 304(II)/149 में 10 साल का कारावास एवं एससी/एसटी एक्ट 3(2)(v) में आजीवन कारावास + ₹10,000 जुर्माना। फैसला सुनते ही सभी दोषियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। अदालती प्रक्रिया की प्रति, कानून की गरिमा के अनुसार, उन्हें निःशुल्क उपलब्ध कराई गई। अभियोजन से लोक अभियोजक उमेश दीक्षित एवं बचाव पक्ष से अधिवक्ता साकेत प्रताप देव ने दलीलें दी।






