Bihar : अनाथालय में पल-बढ़ रहे लावारिस धर्मराज की किस्मत ही बदल गई। अब वो विदेश में पले-बढ़ेगा, वहीं पढ़ाई भी करेगा। उसे गोद ले लिया स्वीडन के दंपत्ति ने। 2 साल के धर्मराज को गोद लेने वाले शख्स संजय डेनियल पेशे से बिजनेसमैन हैं, वहीं उनकी पत्नी कैटरीना संजय ओल्सेन लाइब्रेरियन है। गोद लेने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन तरीके से की गई। स्वीडन से भारत आये दंपत्ति ने बेगुसराय के DM रोशन कुशवाहा के सामने बच्चे को गोद लिया। अनाथ धर्मराज को नये साल पर नया परिवार मिल गया। विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान बेगूसराय में गोद लेने आये विदेशी जोड़े को देखने के लिये भीड़ उमड़ पड़ी। धर्मराज को गोद लेने के बाद विदेशी जोड़ा भी बहुत खुश थे। लावारिस धर्मराज का सबकुछ बदल गया। उसकी सोई तकदीर जाग उठी।
DM रोशन कुशवाहा और विशेष दत्तक ग्रहण केंद्र की प्रभारी श्रुति कुमारी ने मीडिया को बताया कि गोद लेने की प्रक्रिया को सरकार ने काफी सरल कर दिया है। विभाग के वेबसाइट पर ऑनलाइन प्रक्रिया कर बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए गोद दिया जाता है। गोद देने के बाद भी लगातार बच्चों की मॉनिटरिंग की जाती है। जिससे यह पता चल सके कि बच्चों की परवरिश सही से हो रही है या नहीं। गोद लेने वाले दंपतियों को कई नियम कानून से गुजरना पड़ता हैं, वहीं सही पाये जाने के बाद ही उन्हें गोद दिया जाता है। इस नये साल अनाथालय में पल-बढ़ रहे 4 लावारिस बच्चों को गोद लिया गया। जनवरी माह में पटना के दो दंपत्ति, आंध्र प्रदेश की एक दंपत्ति ने 3 बच्चों को गोद लिया। वहीं एक दंपत्ति समंदर पार स्वीडन से बेगूसराय से शनिवार को पहुंचे थे।
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