Kohramlive : कठोर तपस्या और सांसारिक मोह माया से मुक्त नागा साधुओ (Naga Sadhu) का नये साल में बड़ा जुटान महाकुंभ में दिखाई दे सकता है। सनातन धर्म के खास समुदाय माने जाने वाले नागा साधु भगवान शिव और शक्ति के पुजारी होते हैं। खुला बदन पूरे शरीर में राख की लेप उनकी खास पहचान होती है। यही वजह है कि बदलते मौसम का भी उनके बदन पर कोई असर नहीं होता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इनके आशीर्वाद में बहुत दम माना गया है।
क्या है नागा साधुओं से महाकुंभ का संबंध (Naga Sadhu)
12 साल बाद ही महाकुंभ का आयोजन होता है। यह मुख्य रूप से प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित किया जाता हैं। कुंभ के मेले में नागा साधुओं की मौजूदगी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। महाकुंभ के दौरान सबसे पहले नागा साधु ही पवित्र नदियों में शाही स्नान करते हैं।
महाकुंभ खत्म होने के बाद यह साधु हिमालय, जंगल या गुफाओं में वापस लौट जाते हैं। यह अधिक समय योग और तपस्या में बिताते हैं। इन साधुओं का जीवन काफी रहस्यमई होता है, जिसके बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं होता है। यह लोग सांसारिक सुखों से बहुत दूर रहते हैं और ज्यादा समय पूजा पाठ में बिताते हैं।
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