Ranchi(Akhilesh Kumar) : राजधानी रांची से सटे नामकुम की हरातु घाटी में एक बार फिर धरती कांपी, किसी भूकंप से नहीं, बल्कि सैकड़ों दिलों की चोट से, जिन्होंने सरना झंडा गाड़कर ऐलान कर दिया, “ये जमीन हमारी मां है और मां को बेआबरू नहीं होने देंगे…” बीते दिन जब शहर की रफ्तार अपने रंग में थी, तब हरातु के ग्रामीणों ने अपनी जमीन को बचाने का बिगुल फूंक दिया। रेलवे के जमीन अधिग्रहण की खबर ने जैसे नींद तोड़ी हो, और सैकड़ों पुरुष, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे खेतों की मेंड़ पर इकट्ठा हो गये। ग्रामीणों ने वहीं सरना झंडा गाड़ा, वहीं चूल्हा जलाया और वहीं पत्तल पर खाना परोसा। क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं वे हटे और जमीन पर JCB चल जाये। नारे लगे,”बिना सत्यापन, नहीं देंगे एक ईंच जमीन।” लोगों का इल्जाम था कि रेलवे ने बिना अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किये, फोर्स के साथ आकर जमीन को समतल करना शुरू कर दिया था। लेकिन ग्रामीणों ने जैसे संकल्प लिया था, “मर जायेंगे, लेकिन जमीन नहीं छोड़ेंगे।” गांव के मुखिया नूतन पाहन और पंचायत समिति सदस्य अरविंद लोहरा ने सवाल उठाया, “जहां दारू का ठेका खोलना हो, वहां ग्रामसभा की अनुमति जरूरी होती है तो फिर यहां क्यों नहीं?” राजकिशोर महतो, मधु लोहरा और किस्टो कुजूर ने भी एक स्वर में कहा, “ग्रामसभा सर्वोपरि है।” उन्होंने साफ किया, “हम विकास के दुश्मन नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर धोखा नहीं चाहिये।” “सड़क से लेकर सदन तक घेराव करेंगे।” ग्रामीणों ने बताया कि वे DRM को पहले ही आवेदन दे चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी न तो कोई जवाब मिला, न मुआवजा, और न ही कोई संवाद। विरोध की आग जब तेज हुई, तो प्रशासन ने फिलहाल काम रुकवा दिया है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है,”अगर बातचीत नहीं हुई, तो अगला पड़ाव दिल्ली भी होगा।” सुनें क्या बोले गांववाले…












