Palamu : लातेहार की उन शांत वादियों ने बहुत कुछ देखा है, कभी गोलियों की गूंज, कभी रातों को बिखरती दहशत, कभी रास्तों पर पसरा सन्नाटा। कभी JJMP का नाम लेते ही लोगों की धड़कनें तेज हो जाती थीं और गांव की पगडंडियां सहम जाती थीं। पर वक्त की करवट देखिये, अब उसी धरती पर शांति की फसल उग रही है। पिछले छह महीनों में वह हुआ, जिसकी उम्मीद लोग बरसों से कर रहे थे, JJMP का नामोनिशान मिट गया।
अंत की पहली आहट
इस कहानी की शुरुआत तब हुई जब मई की तपती दोपहरी में संगठन का कुख्यात सुप्रीमो पप्पू लोहरा (10 लाख इनामी) और उसका सब-जोनल कमांडर मुठभेड़ में ढेर हो गये। JJMP की जड़ें हिल गईं, गुट में भगदड़ मच गई और आतंक की दीवार चरमराने लगी। बीते 18 जून को एरिया कमांडर बैजनाथ सिंह ने हथियार डाल दिये। 15 जुलाई को नया सुप्रीमो लवलेश गंझू (5 लाख इनामी) भी टूट गया, पुलिस के सामने घुटने टेक दिये। बीते अगस्त माह दो और सक्रिय नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया। बीते 1 सितम्बर को JJMP को सबसे गहरी चोट लगी। इस दिन पुलिस लाइन में जो नजारा दिखा, उससे JJMP की कमर हमेशा के लिए टूट गई, एक साथ 9 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, जिनमें 5 इनामी थे। दो बचे हुए कमांडरों ने भी हथियार रखकर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। गोला-बारूद, राइफलें, विस्फोटक, सब कुछ पुलिस को सौंपा गया। लातेहार के SP कुमार गौरव ने मीडिया से कहा कि “हमने मौका दिया, जो सुधरा उन्हें अपनाया। जो नहीं माने, उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की। अब JJMP खत्म है। मार्च 2026 तक लातेहार को पूरी तरह नक्सल-मुक्त करना लक्ष्य है।”






