Palamu : पलामू के घने जंगलों में अब एक आखिरी साया बचा है, सालों से डर का पर्याय रहा कुख्यात(Naxal) मनोहर गंझू उर्फ सोहन गंझू झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाले नक्सल कॉरिडोर में अब केवल एक बड़ा कमांडर बचा है। वह पुलिस के निशाने पर है। लातेहार के बालूमाथ थाना क्षेत्र के नगरटोला का रहने वाला माओवादी संगठन का जोनल कमांडर(Naxal) मनोहर गंझू उर्फ सोहन गंझू पर सरकार ने 10 लाख रुपये का ईनाम रखा है। AK-47 जैसे हथियारों से लैस मनोहर के एक जंगल में छुपे रहने की गुप्त सूचना पुलिस को मिली है।
पूरे कॉरिडोर में इकलौता बड़ा कमांडर(Naxal) मनोहर
वह चतरा, पलामू और लातेहार का सीमावर्ती इलाके में एक्टिव है। यही क्षेत्र झारखंड-बिहार-छत्तीसगढ़ कॉरिडोर को जोड़ता है। इस पूरे कॉरिडोर में इकलौता बड़ा कमांडर बचा हुआ है। पुलिस को खबर मिली है कि मनोहर की टीम पहले साथ थी, अब अलग-अलग हो चुकी है। पुलिस ने घेराबंदी तेज कर दी है। पलामू क्षेत्र के DIG कौशल किशोर की देखरेख में ताबड़तोड़ अभियान चलाये जा रहे हैं, वहीं, DIG कौशल किशोर ने बचे हुये माओवादियों से कहा है कि सरेंडर करें, वर्ना कार्रवाई तय है।
साल 2016-17 में मनोहर(Naxal) का नाम तब आतंक के तौर पर उछला था, जब औरंगाबाद-गया में उग्रवादियों के हमले में 10 जवान शहीद हो गये थे। साल 2011 में पलामू में लैंडमाइन ब्लास्ट में जवान शहीद हुये थे। वह IED विस्फोट करने में माहिर समझा जाता है।
![]()
इसे भी पढ़ें : 60% हुआ DA, सरकारी मुलाजिमों की सैलरी बढ़ी…
इसे भी पढ़ें : Sunday : आखिर रविवार को ही क्यों मिलता है वीकऑफ? रोचक बातें… जानें






