Kohramlive : भाद्रपद पूर्णिमा की रात जब आसमान पर फैला अंधेरा एक अनूठे चमत्कार का साक्षी बना। आज यानी 7 सितम्बर की रात भारत समेत दुनिया ने देखा साल का आखिरी पूर्ण चंद्रग्रहण। चंद्रग्रहण का आरंभ रात 9 बजकर 58 मिनट में हुआ। खग्रास शुरू 11 बजकर 01 मिनट, मध्यकाल 11 बजकर 42 मिनट, खग्रास समाप्त 1 बजकर 23 मिनट, समापन 1 बजकर 26 मिनट पर होगा। कुल अवधि 3 घंटे 29 मिनट। रात 11 से 12.22 के बीच चांद ने ओढ़ी लाल चूनर – जिसे दुनिया ने ब्लड मून कहा।
122 साल बाद का दुर्लभ संयोग
इस बार चंद्रग्रहण का समय और संयोग अद्वितीय रहा। पितृपक्ष के पहले दिन ग्रहण पड़ना शनि और गुरु की युति का मिलना, ऐसा संयोग 122 वर्षों बाद घटित हुआ। ग्रहण काल में चावल, दूध, घी, सफेद वस्त्र और चांदी का दान शुभ माना गया। ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः और महामृत्युंजय मंत्र का जाप फलदायी बताया गया। श्राद्ध, तर्पण, हवन और ग्रंथ पाठ से पितरों का आशीर्वाद पाने की परंपरा निभाई गई। ग्रहण खत्म होते ही स्नान और गंगाजल छिड़काव से नकारात्मकता दूर करने की सलाह दी गई।
ग्रहण के दौरान ये न करें
- मंदिर की मूर्तियों को न छुयें, उन्हें ढक दें।
- तुलसी, पीपल, बरगद को न छुयें।
- झगड़ा, वाद-विवाद और दांपत्य संबंधों से परहेज।
- चाकू, कैंची, सुई जैसी नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करें।
- गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी की सलाह दी गई।
कहां-कहां दिखा ग्रहण
रांची, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, पटना, बेंगलुरु, चेन्नई, अहमदाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, देहरादून…
पूरे भारत ने इस अद्भुत चांद की लालिमा को देखा।
चांद का बदलता रंग
- शुरू में हल्की धुंधली परत,
- फिर नारंगी आभा,
- और मध्यरात्रि को – खून-सा लाल चांद।
लाखों आँखों ने आकाश की ओर टकटकी लगाये इस चमत्कारिक दृश्य को देखा और मन ही मन दुआ की –
“जैसे चाँद अंधकार से निकलकर नया रूप लेता है, वैसे ही हमारे जीवन से हर अंधेरा मिट जाये।”










