Chouparan(Krishna Paswan) : मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर जब शहरों में तिल-गुड़ और पतंगों की तैयारियाँ चल रही थीं, उसी वक्त समाज के सबसे सुदूर कोने में रहने वाले आदिम जनजाति बिरहोर परिवारों के बीच खुशियां बांटने कुछ लोग पहुंचे, उनका नाम था आपदा मित्र सेवा फाउंडेशन और चौपारण क्वींस। कठंबा क्षेत्र में बसे बिरहोर परिवारों के बीच मकर संक्रांति की परंपरा को जीवंत करते हुये चूड़ा, गुड़, तिलकुट का वितरण किया गया। वहीं बच्चों के लिये बिस्कुट, मिक्चरपतंग और धागा, कॉपी, पेंसिल, रबर जैसी उपयोगी सामग्री दी गई। पतंग हाथ में आते ही बच्चों की आंखों में जो चमक दिखी, वही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। आपदा मित्रों ने बताया कि वे गुजरे पांच वर्षों से हर पर्व, हर खुशी जरूरतमंदों के साथ साझा करते आ रहे हैं। उनका साफ कहना था कि त्योहार तब ही पूरे होते हैं, जब उनकी खुशी सब तक पहुंचे। सेवा, सहयोग और संवेदना का यह सफर आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
इस नेक काम में चौपारण क्वींस की सदस्यों की भूमिका भी सराहनीय रही। महिलाओं की इस सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक आत्मीय बना दिया। इस सेवा कार्य में संजय राणा, अनिल केशरी, सुधीर केशरी, प्रमोद केशरी, संतोष केशरी, कुंदन केशरी, विवेक कुमार और शिक्षक बद्दी उज्जमा की सराहनीय भूमिका रही। वहीं वितरण कार्यक्रम के दौरान जिप भाग-3 प्रतिनिधि सुधीर कौशल, प्रकाश केशरी, बिक्रम सिंह राठौड़, महेश यादव, अध्यक्ष बिनोद स्वर्णकार, सचिव शशि शेखर, दिलीप राणा, हेमंत साहु, मनीष साहु और आपदा मित्र एंबुलेंस चालक शक्ति चंद्रवंशी सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।
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