Kohramlive : पंडाल के नीचे फूलों की छांव में बैठा था एक सपना। प्रवीन और उसके बचपन का प्यार। रिश्तेदारी में पली मोहब्बत ने जब विवाह का रूप लिया, तो हर आंख नम हो गई थी खुशी से। कर्नाटक के जमखंडी में, जिस दिन दूल्हे प्रवीन ने अपनी दुल्हन की मांग में सिंदूर भरा और तस्वीरें खिंचवानी शुरू कीं, उसके चेहरे की रंगत बदल गई। भीड़ के बीच खड़ा वह युवा दूल्हा अचानक कांपते पैरों के साथ जमीन पर गिर पड़ा।सीने में उठती चुभन और चारों ओर फैली चीखें। एक क्षण पहले जो तालियां बजा रहे थे, अब रोते हुये दौड़ पड़े। उसे अस्पताल पहुंचाया गया, मगर विधि का विधान अंतिम मुहर लगा चुका था। प्रवीन कुरने, 26 साल का था। निजी बैंक में नौकरी करता था। अपने पिता श्रीशैल कुरने के इकलौते सपनों की उड़ान था, जिनकी गूंज अब साइक्लिंग ट्रैक से उठकर श्मशान की चिता तक पहुंच गई। जहां फेरे होने थे, वहां फूलों की सजावट उतारी जा रही थी। जहां डीजे की धुनें थीं, अब शोकगीत गूंज रहे थे। और 15 मिनट के अंदर ही दुल्हन विधवा हो गई। उस नई नवेली कन्या की साड़ी पर अब लाल जोड़े का रंग नहीं, विरह की राख लग चुकी थी। डॉक्टरों ने हार्ट अटैक की आशंका जताई है, लेकिन जवाब अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देगी।












