Giridih : करमा पूजा की रात घर के पीछे बारी में फुसफुसाहट सुन घर का मालिक प्रदीप पंडित चुपके से अपने बारी में गया तो वहां का नजारा देख उसका खून खौल गया। उसकी बेटी अरविंद ठाकुर के साथ खुसूर-फुसूर कर रही थी। प्रदीप पंडित को पहले से ही अरविंद की हरकतों पर शक था। इस वजह से उसने कई बार उसे चेताया भी था और कहा था कि वह उसकी बेटी से दूर हो जाये। उस रात उसने जैसे ही अपनी बेटी को अरविंद के साथ देखा तो एक बड़ा सा पत्थर लेकर उसे दौड़ाया। अरविंद भी वहां से बेताहाशा भागा, पर ज्यादा दूर तक नहीं भाग सका और लड़खड़ा कर गिर पड़ा। इसके बाद प्रदीप पंडित ने पत्थर से कूच-कूच कर उसे मौत के घाट उतार दिया। अरविंद की जान लेने के बाद प्रदीप पंडित ने उसकी डेड बॉडी को अपने घर के पीछे रहनेवाले चेतलाल पंडित की बारी में बने कुएं में फेंक दी।
बीते 16 सितम्बर को अरविंद ठाकुर की लाश मिली। अरविंद के पिता परमेश्वर ठाकुर ने अपने बेटे अरविंद की गुमशुदगी की रिपोर्ट गांडेय थाना में दर्ज कराई थी। पिता ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा करमा पूजा के दिन घर से बाहर निकला, फिर लौट कर नहीं आया। अहारडीह गांव में रहनेवाले अरविंद की लाश मिलने के बाद गांडेय के थानेदार रघुनाथ सिंह इस कांड के असली गुनहगार को खोज निकालने में जुट गये। इस बारे में पुलिस कप्तान डॉ विमल कुमार को सबकुछ बताया गया। उन्होंने इस कांड को गंभीरता से लिया। अनुसंधान में पुलिस को कुछ क्लू मिला। क्लू मिलते ही पुलिस ने प्रदीप पंडित को उठा लिया। पूछताछ में वह पुलिस के सामने टूट गया और अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने अरविंद की हत्या के पीछे छुपे सारे राज पुलिस के सामने उगल दिये और हत्या कब, कैसे और क्यों की, इसके बारे में पुलिस को उक्त रनिंग कमैंट्री बता दी। प्रदीप ने पुलिस को बताया कि अरविंद अक्सर उसकी बेटी से मोबाइल पर बातें करते रहता था। कई बार उसने मना किया, पर वो नहीं माना। इस कारण उसे मार डाला।








