Ranchi : दीपों का पर्व, उजियारे की रात और मां लक्ष्मी की आराधना, राजधानी रांची सोमवार की शाम सचमुच स्वर्णिम दीपोत्सव में बदल गई। जैसे ही सूर्य की अंतिम किरण ढली, पूरे शहर ने एक साथ दीयों की लौ से अंधेरों को मात दी। गली-मोहल्लों से लेकर बाजारों तक हर चौखट सजी थी, हर आंगन महका हुआ था। हवा में घुली थी फूलों की महक और दिलों में थी समृद्धि की कामना। जैसे ही शाम हुई, लोगों ने शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश और महालक्ष्मी का पूजन किया। घरों के बाहर रंग-बिरंगी झालरों की झिलमिलाहट थी, रंगोलियों में सजे थे शुभ-लाभ के चिन्ह और आसमान में फूट रही थी पटाखों की चमक। कॉलोनियों, बाजारों और मंदिरों में फूलों और रोशनी से त्योहार का रंग ऐसा बिखरा कि पूरा शहर किसी स्वर्णिम चित्र में तब्दील हो गया। रांची के मुख्य मंदिरों में रोशनी और फूलों से साज-सज्जा की गई,घंटों की ध्वनि और लक्ष्मी आरती की गूंज में श्रद्धालु मंत्रमुग्ध थे। शहर का हर कोना “जय मां लक्ष्मी” के जयकारों से गूंज उठा।
परंपरा और विश्वास का उजियारा
हिंदू धर्म में दीपावली का विशेष महत्व है। कार्तिक अमावस्या को मनाये जाने वाले इस पर्व से जुड़ी दो ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताएं हैं, इसी दिन भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। वहीं, इसी दिन समुद्र मंथन से महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसलिए यह पर्व केवल दीपों का नहीं, आस्था, समृद्धि और शुभता का उत्सव है।












