Chouparan(Krishna Paswan) : गर्मियों की दोपहरी जैसे चौपारण की गलियों में सन्नाटे का कफन ओढ़े हुये थी, वैसे ही कोयलीकला की हवाओं में कुछ महीनों से एक नाम सरसराता फिर रहा था, नीरज राणा। देवेंद्र राणा का बेटा, जिसकी चाल में शरारत और नजरों में चालाकी थी। गांव के पोखरे के किनारे वो अक्सर दिखता, कभी मोबाइल पर मुस्कुराता, कभी अकेले में कुछ लिखता। किसी ने नहीं जाना कि उसकी आंखें किसके ख्वाब बुन रही थीं। लेकिन एक दिन…खरहुआ की एक लड़की अचानक गायब हो गई। परिवार रोता-धोता चौपारण थाना पहुंचा। मां के आंचल से आंसू टपकते थे और पिता की आवाज में कंपकंपी थी — “नीरज राणा… हमारी बिटिया को बहला-फुसला कर भगा ले गया है।” पुलिस हरकत में आई। जांच शुरू हुई, सुराग मिले और फिर एक दिन कोडरमा से वो लड़की मिल गई। वो सहमी हुई थी, लेकिन उसकी आंखों में साहस बचा था। कोर्ट में उसने जो कहा, वो सारा मामला पलट गया, “नीरज राणा मुझे बहला कर ले गया था… मेरी मर्जी नहीं थी।”
यह बयान नीरज राणा के भाग्य पर मुहर बनकर टूटा। चौपारण पुलिस ने गांव-गांव छापेमारी शुरू कर दी। वो अब एक अपराधी था, जिसकी तस्वीर पुलिस डायरी में दर्ज हो चुकी थी। और फिर, आज की सुबह…चौपारण की वीरान सड़कों पर पुलिस की गाड़ी की आवाज़ गूंजी — और उसी के साथ एक खबर तैर गई —”नीरज राणा गिरफ्तार।” वो अब सलाखों के पीछे है।












