आसमान में दिखेगा ‘ब्लू माइक्रोमून’ का अद्भुत नजारा, जानें कब…

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Kohramlive : रात के आसमान को निहारने वालों के लिये इस हफ्ते का अंत बेहद खास होने वाला है। 31 मई की रात आसमान में एक ऐसा खगोलीय नजारा दिखाई देगा, जिसे वैज्ञानिक भी बेहद दुर्लभ मान रहे हैं। इस दिन “ब्लू माइक्रोमून” पूर्ण चंद्रमा के रूप में नजर आयेगा। यह केवल एक साधारण पूर्णिमा नहीं होगी, बल्कि दो दुर्लभ खगोलीय घटनाओं का अनोखा संगम होगी। यही वजह है कि दुनियाभर के स्काई-वॉचर्स और खगोल प्रेमियों की नजरें अब आसमान पर टिक गई हैं।

क्या होता है ब्लू माइक्रोमून?

नाम सुनकर लग सकता है कि चांद नीले रंग का दिखाई देगा, लेकिन सच इससे बिल्कुल अलग है। “ब्लू मून” उस स्थिति को कहा जाता है जब किसी एक कैलेंडर महीने में दूसरी बार पूर्णिमा पड़ती है। मई 2026 में पहली पूर्णिमा पहले ही हो चुकी है और अब 31 मई को दूसरी पूर्णिमा होगी। इसी वजह से इसे “ब्लू मून” कहा जा रहा है। वहीं “माइक्रोमून” तब बनता है जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे दूर वाले बिंदु यानी “अपोजी” के पास पहुंच जाता है। इस दौरान चांद सामान्य दिनों की तुलना में करीब 6 प्रतिशत छोटा और लगभग 10 प्रतिशत कम चमकीला दिखाई देता है। हालांकि यह अंतर नंगी आंखों से आसानी से पकड़ में नहीं आता।

इतनी दूर होगा चांद

खगोलशास्त्रियों के मुताबिक 31 मई को चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 4 लाख 6 हजार किलोमीटर दूर होगा। भारतीय समयानुसार दोपहर करीब 2.15 बजे चंद्रमा अपनी पूर्ण चमक पर होगा, लेकिन इसका सबसे खूबसूरत दृश्य रात में दिखाई देगा। अगर आप इस दुर्लभ दृश्य का असली आनंद लेना चाहते हैं, तो शहर की चकाचौंध से थोड़ा दूर जाना बेहतर होगा। विशेषज्ञ का कहना है कि छत, पार्क, समुद्र तट, गांव या खुले मैदान जैसी जगहों से चंद्रमा देखना सबसे अच्छा अनुभव होगा। जहां कृत्रिम रोशनी कम होगी, वहां चांद और ज्यादा खूबसूरत नजर आयेगा।

एंटारेस तारे के साथ दिखेगा चांद

इस बार का ब्लू माइक्रोमून एक और वजह से खास माना जा रहा है। दक्षिणी गोलार्ध और प्रशांत क्षेत्र में चंद्रमा चमकीले लाल तारे “एंटारेस” के बेहद करीब दिखाई देगा। भारत समेत उत्तरी गोलार्ध में भी रात के दौरान यह नजारा देखा जा सकेगा।

सुपरमून और माइक्रोमून में क्या फर्क है?

जहां “सुपरमून” पृथ्वी के सबसे करीब आने पर बड़ा और ज्यादा चमकीला दिखाई देता है, वहीं “माइक्रोमून” ठीक इसका उल्टा होता है। माइक्रोमून सुपरमून के मुकाबले करीब 12 से 14 प्रतिशत तक छोटा नजर आ सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जून 2026 में दिखाई देने वाला “स्ट्रॉबेरी मून” भी माइक्रोमून हो सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो लगातार दो माइक्रोमून देखने का दुर्लभ मौका मिलेगा।

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