Kohramlive : भारत विविधताओं की धरती है, जहां हर कोना अपनी अलग पहचान समेटे है। लेकिन इस देश में एक ऐसा भी राज्य है, जहां की फिजाओं में अंग्रेजी घुली हुई है। जहां गलियों में बच्चों की किलकारियां अंग्रेजी में गूंजती हैं, जहां बाजारों में सौदेबाजी भी अंग्रेजी में होती है, और जहां की हर सभा, हर सरकारी दफ्तर अंग्रेजी की रौशनी में सराबोर है।
नागालैंड—उत्तर-पूर्व के पहाड़ों में बसा वह राज्य, जिसने 1967 में अपने लिये अंग्रेजी को अपनाया। यहां न सिर्फ सरकारी कामकाज, बल्कि आम बोलचाल में भी अंग्रेजी का जादू सिर चढ़कर बोलता है। हालांकि, इस मिट्टी में कई और भाषाओं की महक भी बसी हुई है—जेमी, लियांगमाई, कुकी, रोंगमई और लोथा जैसी भाषाएं भी अपनी जगह बनाये हुयेहैं। मगर नागालैंड की खास पहचान इसकी अंग्रेजी से सजी बोली ही है।
यूं तो भारत में हिंदी की धड़कन हर दिल में बसती है, मगर नागालैंड अपनी अलग धुन पर जीता है। यहां की हर गली, हर चौक-चौराहे पर अंग्रेजी के शब्दों की मिठास घुली रहती है। मानो यह राज्य किसी और ही दुनिया का हिस्सा हो, जहां संवाद की जुबां अंग्रेजी में बहती है, मगर दिलों की जुबां उतनी ही गर्मजोशी से धड़कती है। यही तो भारत की खूबसूरती है—एक देश, अनेक भाषाएं, और हर भाषा में बसी आत्मीयता की मिठास।










