Ranchi : रांची का आसमान उमस से भरा था, पर रांची समाहरणालय के परिसर में हल्की ठंडी हवा का झोंका था, उम्मीदों का। हर चेहरा एक कहानी था और हर आंख में किसी न किसी अन्याय के खिलाफ संघर्ष की चमक थी। तभी सामने आया रामेश्वर कुमार यादव, जिसकी आवाज थरथरा रही थी पर आंखों में विश्वास था, “थैंक यू डीसी सर, मेरी जमीन का म्यूटेशन हो गया, भू-माफिया हार गया।” जनता दरबार में आज फिर उम्मीदों ने आवाज पाई, अन्याय हार गया और “मंजूनाथ भजन्त्री” सिर्फ नाम नहीं, एक भरोसे का चेहरा बन गया। DC की पहल पर रामेश्वर के चार साल पुराने दर्द को चंद मिनटों में न्याय में बदल दिया गया। तभी कांके अंचल से एक नया तूफान सामने आया, मदनपुर मौजा में फर्जी म्यूटेशन, परिवार को डराने-धमकाने की शिकायत। रांची के DC ने फौरन आदेश दिया कि “ASO जांच करेंगे, जो दोषी होगा, कानून उसे छोड़ेगा नहीं।” यह आवाज कानून की थी, पर उसके पीछे एक चेतावनी भी थी, भू-माफिया हो या सिस्टम के भीतर छुपे गद्दार, अब जनता दरबार की आंखें सब पर हैं। 31 मार्च से रुकी एक फाइल, रंजीत मोहन की फाइल, एक हफ्ते से टाल-मटोल करता कर्मचारी, पर आज नहीं। DC मंजूनाथ भजन्त्री ने आदेश दिया,“शो-कॉज करो, और एक हफ्ते में काम नहीं हुआ तो प्रपत्र ‘क’—सीधी कार्रवाई तय है।” इसी तरह जनता दरबार में पहुंचे रामवृक्ष उरांव की आंखों में चिंता थी, इस महीने बेटी की शादी थी, लेकिन जेब खाली है। DC ने फोन उठाया, “मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत सहयोग सुनिश्चित कीजिये।” यह देख एक पिता की आंखों से टपके आंसू, कृतज्ञता में भीगे हुये थे। एक वृद्ध पिता आया, बेटा अब इस दुनिया में नहीं, बस एक मुआवजे की उम्मीद लेकर आया हूं, DC साहब ने डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर को बुलाया, कागजात देखे और कहा, “मुआवजा मिलेगा, ये मेरा वादा है।”
अंत में DC बोले, नशा छोड़िये, सम्मान पाईये
जनता दरबार पहुंची महिलाों से DC ने पूछा, “मंईयां सम्मान योजना का लाभ मिला या नहीं?” और फिर भीड़ की तरफ देखा और कहा, “नशे को घर से निकाल फेंको, अबुआ साथी बनो, हम साथ हैं।”








