Palamu : पलामू के मेदिनीनगर की उस सुबह में न सड़कों पर चहल-पहल थी, न ही स्कूल की घंटियों की गूंज, लेकिन टाउन थाना के आंगन में एक अलग ही सिहरन थी, उम्मीद की, बदलाव की, और सशक्त नारी शक्ति की। हरी-हरी यूनिफॉर्म में सजी वो किशोरियां, जो अब तक पुलिस शब्द सुनते ही कांप उठती थीं, आज सिर ऊंचा कर थाने के अहाते में कदम रख रही थीं। हर कदम पर आंखों में जिज्ञासा थी और दिल में एक सवाल, क्या सच में पुलिस सिर्फ डर के लिये होती है? लेकिन आज का दिन, उस प्रांगण में खड़ी हर लड़की को एक जवाब मिला, नहीं… पुलिस डर नहीं, भरोसे का नाम है।
शाह इंस्पेक्टर देवव्रत पोद्दार, जिन्होंने न सिर्फ उन्हें FIR की बारीकियां समझाईं, बल्कि ये भी बताया कि अपराधी से लड़ने की प्रक्रिया सिर्फ कानून की नहीं, साहस की भी होती है। उनकी आवाज में कठोरता नहीं, स्नेह और सुरक्षा की परछाईं थी। “बिटिया, जब डर लगे तो भागो मत… 112 पर कॉल करो। पुलिस अब तुम्हारी दोस्त है।” उनके इन शब्दों ने न जाने कितनी दिलों की दीवारें तोड़ दीं। छात्राओं ने पिस्टल को हाथ में लेकर महसूस किया, अब वे शिकार नहीं, सुरक्षा की हिस्सेदार बन सकती हैं। एक छात्रा ने हौले से कहा, “सर, आज पहली बार लगा कि वर्दी पहनने का सपना पूरा किया जा सकता है।” कार्यक्रम के अंत में जलपान के साथ पुलिस ने जो पौधा उपहारस्वरूप भेंट किया, वो सिर्फ एक गमले की हरियाला का हिस्सा नहीं था, वो भरोसे का पौधा था, जो आजाद सोच के साथ दिलों में बोया गया। ये ‘बदलाव की दस्तक’ थी —जिसमें बेटियों ने डर को पीछे छोड़ा और उम्मीद को गले लगाया।
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