UP : रात थी… चांद बदली में छिपा था और हवाओं में रहस्य का सन्नाटा था। संभल के एक छोटे से गांव बमनपुरी में, राजपाल की आंखों में नींद नहीं थी। उसकी मां की पीठ में दर्द था, और इलाज के नाम पर गांव के दो युवक उसे नरौरा की ओर ले जा रहे थे। लेकिन ये सफर इलाज का नहीं था—ये था उस दलदल की ओर, जहां आत्मायें नहीं, शरीर चढ़ावे चढ़ाये जाते थे।


“गुरु का गुनाह”
जिसे सब ‘गुरु’ कहते थे, वो असल में एक राक्षस था… सफेद चादर ओढ़े, हवन के धुयें में छिपा हुआ, उसके चेहरे पर दाढ़ी कम और धोखा ज्यादा था। “नोटों की बारिश होगी,” उसने कहा था। लेकिन वह बारिश नहीं, एक ज्वाला थी, जिसमें मासूम लड़कियों की आबरू जल रही थी। उस तंत्र के खेल में, लंबाई मापी जाती थी, गोदने देखे जाते थे… और फिर शुरू होती थी तांत्रिक क्रिया—जिसमें पूजा नहीं, पाप होता था। मथुरा की एक नामचीन यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाला प्रोफेसर दशरथ सिंह… लेकिन उसकी असली किताबों में ज्ञान नहीं, गुनाह छिपा था। वह कोड वर्ड में बात करता था, ‘टीटी’, ‘टमाटर’, ‘आर्टिकल’… और हर शब्द के पीछे छिपी थी एक लड़की की चीख। वो लड़कियों का फार्म भरवाता, कुंवारी होने की तस्दीक करता… और फिर तांत्रिक को सौंप देता। लाखन… गिरोह का सरगना नहीं, जैसे कोई मायावी किरदार — मुस्कराता कम, फुसलाता ज्यादा। उसका हर शब्द जादू था, हर झूठ पूजा की तरह पवित्र बना दिया गया था। धनवर्षा का वादा — ऐसा सपना जिसमें गरीब भी करोड़पति बन जाता है… लेकिन इस सपने के बदले मांग थी — ‘एक विशेष कन्या।’ और फिर शुरू हुई एक शैतानी रस्म — जहां पूजा नहीं, शोषण होता था। गिरोह की कोड भाषा में वो ‘मीडिया’ थी, वो ‘टमाटर’, वो ‘आर्टिकल’, जिसे देवताओं के नाम पर अपवित्र किया जाता था।


इस गिरोह ने जंगल से जीव, गली से बच्चियां और मंदिर से आस्था सब चुरा ली। दो-मुंहे सांप, नख वाला कछुआ और देवी के नाम पर तंत्र। हर पूजा की थाली में चढ़ता था किसी मासूम का शरीर। और हर हवनकुंड की राख में छिपा होता था एक अनकहा गुनाह। एक दिन… वह मोबाइल से निकली एक तस्वीर ने पूरे तिलिस्म को तोड़ डाला। पुलिस की नजरें पैनी हुईं, हाथ बंधे नहीं थे। 42 से ज्यादा लड़कियों की तस्वीरें, चौंकाने वाले वीडियो, और तांत्रिक क्रिया के नाम पर किया गया हर अत्याचार एक-एक करके खुलने लगा। धनारी की पुलिस, जो कभी शांत थी, अब आंधी बन गई थी। SP विश्नोई ने गिरोह को जड़ से उखाड़ने की ठान ली थी। पुलिस ने जब इस मायावी संसार की दीवार तोड़ी, तो मोबाइलों में कैद सच सामने आया — 42 से अधिक युवतियों की तस्वीरें, ऑडियो रिकॉर्डिंग, कोड वर्ड… और न जाने कितने पाप। एक मां की पीठ के दर्द से शुरू हुआ ये सिलसिला, इंसानियत के दर्द में बदल गया। ये कहानी नहीं, एक कालिख है —









